Lakhisarai के नक्सल प्रभावित गांवों में विकास की पहल, आदिवासियों को मिल रहा सरकारी योजनाओं का लाभ

Lakhisarai: बिहार के लखीसराय जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों में अब बदलाव दिख रहा है। प्रशासन का मुख्य मकसद चानन प्रखंड के दूर-दराज गांवों में रहने वाले आदिवासी परिवारों तक केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को पह

Lakhisarai: बिहार के लखीसराय जिले के नक्सल प्रभावित इलाकों में अब बदलाव दिख रहा है। प्रशासन का मुख्य मकसद चानन प्रखंड के दूर-दराज गांवों में रहने वाले आदिवासी परिवारों तक केंद्र और राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं को पहुंचाना है। इसके लिए बुधवार को संग्रामपुर और भलुई पंचायतों के कछुआ और सतघरवा कोडासी गांवों में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया।

जिला प्रशासन इन इलाकों में बुनियादी ढाँचे को मजबूत करने पर जोर दे रहा है। जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार, डीडीसी सुमित कुमार और एडीएम नीरज कुमार जैसे बड़े अधिकारी खुद गोवरदाहा कोड़ासी और अन्य आदिवासी क्षेत्रों का दौरा कर रहे हैं। जिलाधिकारी गोवरदाहा, कछुआ, जगुआजोर और राजकॉल जैसे गांवों में शिविर लगाकर लोगों की समस्याएं सुन रहे हैं और विकास योजनाओं को गति दे रहे हैं।

विकास की इस दौड़ में ‘जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ जैसी योजनाओं से आदिवासी समाज को सशक्त बनाया जा रहा है। चानन, पीरीबाजार और कजरा जैसे इलाके जो कभी उग्रवाद से प्रभावित थे, वहां अब सड़कें, स्वास्थ्य केंद्र और पर्यटन स्थलों का तेजी से निर्माण हो रहा है।

महिला सशक्तिकरण में जीविका (BRLPS) की भूमिका अहम रही है। सूर्यगढ़ा प्रखंड के टाली कोड़ासी और राजघाट कोल जैसे गांवों की महिलाएं अब स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर बकरी पालन और पत्तल निर्माण के जरिए अपनी कमाई कर रही हैं।

हाल ही में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपनी ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान लखीसराय में 144 परियोजनाओं का शिलान्यास और 117 योजनाओं का उद्घाटन किया। वहीं, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने भी निर्देश दिए हैं कि औरंगाबाद, गया, जमुई और लखीसराय जैसे जिलों में सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बाधा के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए। केंद्र सरकार भी ‘रेड कॉरिडोर’ को ‘ग्रोथ कॉरिडोर’ में बदलने के लिए बुनियादी सुविधाओं और शासन में सुधार पर काम कर रही है।