Saudi Arabia पर ड्रोन हमले के बाद Kuwait ने जताई नाराजगी, ईरान समर्थित मिलिशिया पर लगाया आरोप
World : सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों पर हुए ड्रोन हमलों के बाद अब कुवैत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। कुवै
World : सऊदी अरब के तेल क्षेत्रों पर हुए ड्रोन हमलों के बाद अब कुवैत ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की कड़ी निंदा की है और इसे क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बताया है। कुवैत ने साफ किया है कि वह इस मुश्किल समय में सऊदी अरब के साथ खड़ा है और उसकी सुरक्षा और संप्रभुता का पूरा समर्थन करता है।
जानकारी के मुताबिक, 28 जुलाई 2026 की शाम को सऊदी अरब के पूर्वी प्रांत में स्थित पेट्रोलियम सुविधाओं को निशाना बनाकर ड्रोन हमले की कोशिश की गई थी। कुवैत ने इन हमलों के लिए इराक में सक्रिय ईरान समर्थित मिलिशिया को जिम्मेदार ठहराया है। कुवैत के विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि सऊदी अरब की सुरक्षा असल में कुवैत और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सभी देशों की सुरक्षा से जुड़ी हुई है। इस दौरान संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का हवाला देते हुए आत्मरक्षा के अधिकार का भी जिक्र किया गया।
इस तनाव के बीच सऊदी अरब ने भी कड़ा एक्शन लिया है। सऊदी विदेश मंत्रालय ने इन हमलों की निंदा की और इराक सरकार से अपनी जमीन का गलत इस्तेमाल रोकने की मांग की। 28 जुलाई को ही सऊदी अरब ने अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के साथ मिलकर इराक में ईरान समर्थित मिलिशिया के ठिकानों पर सटीक हमले किए। अमेरिका और सऊदी सेना ने मिलकर पूर्वी इराक में कई हथियारों और रसद केंद्रों को निशाना बनाया।
इससे पहले 26 और 27 जुलाई को भी सऊदी अरब के रियाद और पूर्वी प्रांत के तेल क्षेत्रों पर हमले की कोशिशें हुई थीं। सऊदी रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मल्की ने बताया कि एयर डिफेंस सिस्टम ने इन ड्रोन्स को हवा में ही नष्ट कर दिया था। इराक के प्रधानमंत्री अली अल-जैदी अब इस मुद्दे पर चर्चा करने के लिए सऊदी अरब का दौरा कर सकते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।