Kishanganj के 22 सीमावर्ती गांवों की बदलेगी सूरत, 52 करोड़ की 183 योजनाओं का प्रस्ताव केंद्र को भेजा गया
Kishanganj: बिहार के किशनगंज जिले में भारत-नेपाल सीमा से सटे 22 गांवों के विकास के लिए बड़ी तैयारी की गई है। ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2’ के तहत 52 करोड़ रुपये की लागत वाली 183 विकास योजनाओं का प्रस्ताव केंद
Kishanganj: बिहार के किशनगंज जिले में भारत-नेपाल सीमा से सटे 22 गांवों के विकास के लिए बड़ी तैयारी की गई है। ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम-2’ के तहत 52 करोड़ रुपये की लागत वाली 183 विकास योजनाओं का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा गया है। इन योजनाओं का मुख्य मकसद सीमावर्ती इलाकों में बुनियादी सुविधाओं को सुधारना और लोगों के लिए रोजगार के मौके पैदा करना है ताकि गांव से पलायन को रोका जा सके।
इस योजना के तहत गांवों में सड़क, बिजली, शुद्ध पेयजल, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। साथ ही, मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी को बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया है। इन गांवों में सामुदायिक भवन, पुस्तकालय, हाई मास्ट लाइट और मार्केटिंग यार्ड जैसी जरूरी सुविधाओं का निर्माण होगा। प्रशासन का मानना है कि इन सुविधाओं से स्थानीय लोगों की आजीविका के नए अवसर खुलेंगे और जीवन स्तर में सुधार आएगा।
परियोजना की तैयारी के लिए पहले एक सर्वे किया गया था जिसमें कुल 215 योजनाएं चिन्हित हुई थीं। हालांकि, तकनीकी और वित्तीय जांच के बाद अब 183 योजनाओं को अंतिम रूप दिया गया है। इस पूरे मामले की समीक्षा बिहार के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत और डीजीपी विनय कुमार की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में की गई थी। जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने भी इन योजनाओं की लागत और तकनीकी पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की है।
यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है जिसका लक्ष्य वित्तीय वर्ष 2028-29 तक इन सीमावर्ती गांवों का पूरी तरह विकास करना है। जिन 22 गांवों का चयन किया गया है, उनमें ठाकुरगंज प्रखंड के 6, दिघलबैंक प्रखंड के 9 और टेढ़ागाछ प्रखंड के 7 गांव शामिल हैं। इनमें भेदरानी, सुखानी, ग्वालटोली, भातगांव, चुरली, हुलहुली, टप्पू, बैदनाथ परसा, मालटोली, लोहागाड़ा, पंचगच्छी, दौरिया, सिंघीमाड़ी, तुलसिया, धनतोला, रामपुर, पिपरा, फूलबाड़ी, झाड़ा, कंचनबाड़ी, चिचोड़ा और बैरिया जैसे गांव शामिल हैं। अब केंद्र सरकार से हरी झंडी मिलते ही इन क्षेत्रों में काम शुरू हो जाएगा।