Bihar: बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली राजकुमारी देवी, जिन्हें लोग ‘किसान चाची’ के नाम से जानते हैं, उनकी कहानी आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है। 72 साल की उम्र में उन्होंने एक बड़ा बिजनेस साम्राज्य खड़ा किय
Bihar: बिहार के मुजफ्फरपुर की रहने वाली राजकुमारी देवी, जिन्हें लोग ‘किसान चाची’ के नाम से जानते हैं, उनकी कहानी आज लाखों लोगों के लिए प्रेरणा है। 72 साल की उम्र में उन्होंने एक बड़ा बिजनेस साम्राज्य खड़ा किया है। कभी साइकिल पर घर-घर जाकर अचार बेचने वाली राजकुमारी देवी आज पद्मश्री से सम्मानित हैं और उनका कारोबार करोड़ों में पहुंच चुका है। उनके बनाए उत्पाद आज बड़े शहरों के मॉल्स की शोभा बढ़ा रहे हैं।
किसान चाची के बिजनेस की शुरुआत कैसे हुई और क्या हैं उनकी उपलब्धियां?
राजकुमारी देवी ने 1990 के दशक में खेती के नए और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाकर अपने काम की शुरुआत की थी। साल 2000 के आसपास उन्होंने अपने घर से अचार बनाना शुरू किया, जो आज पूरे देश में किसान चाची के अचार के नाम से मशहूर है। उन्हें साल 2019 में भारत के चौथे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्मश्री से नवाजा गया था। इससे पहले 2006 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें किसान श्री अवार्ड दिया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी गुजरात में एक मुलाकात के दौरान उन्हें किसान चाची कहकर पुकारा था।
महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और बिजनेस मॉडल की पूरी जानकारी
किसान चाची ने अपने काम के जरिए 300 से ज्यादा महिलाओं को स्वयं सहायता समूहों से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाया है। उन्होंने पूसा एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से ट्रेनिंग ली और फिर दूसरी महिलाओं को भी खेती और अचार बनाने की ट्रेनिंग दी। आज उनका बिजनेस मॉडल काफी सफल है और उनके उत्पाद दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों के मॉल्स तक पहुंच रहे हैं। उनके संघर्ष के दिनों में समाज के तानों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 40 साल की उम्र में साइकिल चलाना सीखकर अपना व्यापार आगे बढ़ाया।
| मुख्य बिंदु |
जानकारी |
| मासिक सप्लाई |
करीब 30 लाख रुपये का माल |
| रोजगार |
300 से ज्यादा महिलाएं जुड़ी हैं |
| प्रारंभिक संघर्ष |
40 साल की उम्र में साइकिल चलाना सीखा |
| प्रमुख पुरस्कार |
पद्मश्री (2019), किसान श्री (2006) |