Lucknow: KGMU दवा घोटाले में बड़ा खुलासा, बर्खास्त कर्मचारियों की अलमारियों से मिली 3 लाख की दवाएं
UP/Lucknow: राजधानी के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में चल रहा करोड़ों रुपये का दवा घोटाला अब और गहराता जा रहा है। सोमवार को जांच समिति की मौजूदगी में बर्खास्त कर्मचारियों की तीन और अलमारियों के ताले तुड़वाए गए,
UP/Lucknow: राजधानी के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में चल रहा करोड़ों रुपये का दवा घोटाला अब और गहराता जा रहा है। सोमवार को जांच समिति की मौजूदगी में बर्खास्त कर्मचारियों की तीन और अलमारियों के ताले तुड़वाए गए, जहाँ से करीब 3 लाख रुपये की दवाएं बरामद हुई हैं। यूरोलॉजी विभाग में हुए इस खेल की जांच अब काफी तेज हो गई है।
इस पूरे मामले में KGMU ने 5 जुलाई को उत्तर प्रदेश सरकार को तीन पन्नों की एक विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में बताया गया है कि यूरोलॉजी विभाग में दवाओं का मासिक खर्च अचानक 10 लाख रुपये से बढ़कर 45 लाख रुपये हो गया था। आरोप है कि स्टाफ ने फर्जी और मृत मरीजों के नाम पर महंगी कैंसर की दवाएं जारी की थीं। यह खेल मुख्य रूप से सरकारी खर्च पर चलने वाली ‘असाध्य योजना’ और ‘आयुष्मान भारत’ योजना के तहत खरीदी गई दवाओं के साथ किया गया।
इस घोटाले के बाद प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। तीन कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों (P Singh, H Srivastava, S Tiwari) को नौकरी से निकाल दिया गया है और उनके खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है। इसके अलावा, यूरोलॉजी विभाग के पूर्व हेड डॉ. अपुल गोयल को लापरवाही के आरोप में पद से हटाकर दूसरे विभाग में भेज दिया गया है। फार्मासिस्ट अरशद वासी को सस्पेंड कर उनके खिलाफ आपराधिक मामला चलाया जा रहा है।
जांच का दायरा अब नेत्र रोग विभाग (Ophthalmology) तक भी बढ़ गया है, जहाँ डॉक्टरों द्वारा मरीजों को चुनिंदा प्राइवेट दुकानों से लेंस और दवाएं खरीदने के लिए कहने की शिकायतें मिली हैं। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक के निर्देश पर बनी पांच सदस्यीय कमेटी अब इस पूरे मामले की बारीकी से जांच कर रही है। KGMU प्रशासन ने यह भी साफ किया है कि जिस आउटसोर्सिंग एजेंसी के जरिए यह गड़बड़ी हुई, उससे पैसों की वसूली की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।