Lucknow: KGMU के डॉक्टरों ने बचाई युवक की जान, छाती में धंसा था चाकू

Lucknow: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने एक कमाल कर दिखाया है। डॉक्टरों ने एक 34 साल के युवक की जान बचाई जिसकी छाती में चाकू धंसा हुआ था। यह चाकू दाहिने फेफड़े तक जा पहुंचा था, जिस

Lucknow: किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (KGMU) के ट्रॉमा सेंटर के डॉक्टरों ने एक कमाल कर दिखाया है। डॉक्टरों ने एक 34 साल के युवक की जान बचाई जिसकी छाती में चाकू धंसा हुआ था। यह चाकू दाहिने फेफड़े तक जा पहुंचा था, जिससे युवक की हालत बेहद नाजुक थी।

लखीमपुर खीरी का रहने वाला सर्वेश 4 जुलाई 2026 की रात करीब 9 बजे एक हमले का शिकार हुआ था। हमलावरों ने उस पर धारदार हथियार से हमला किया, जिससे चाकू उसकी दाहिनी छाती में गहराई तक धंस गया। सर्वेश को 5 जुलाई की सुबह करीब 5 बजे KGMU ट्रॉमा सेंटर लाया गया। जांच में पता चला कि चाकू का ब्लेड दाहिने फुफ्फुसीय हिलम (Pulmonary Hilum) तक पहुंच गया था और उसने फुफ्फुसीय धमनी (Pulmonary Artery Branch) की एक शाखा को गंभीर नुकसान पहुंचाया था।

इस जटिल स्थिति को देखते हुए डॉ. वैभव जायसवाल के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने ‘राइट एंटेरोलैटरल थोराकोटॉमी’ (Right Anterolateral Thoracotomy) नाम की सर्जरी की। ऑपरेशन के दौरान सबसे बड़ी चुनौती खून के बहाव को रोकना था। डॉक्टरों ने पहले क्षतिग्रस्त रक्तवाहिनी को सुरक्षित तरीके से कंट्रोल किया और उसके बाद बहुत सावधानी से चाकू के ब्लेड को बाहर निकाला।

इस सफल ऑपरेशन में डॉ. अनीकेश, डॉ. यदुवेंद्र धीर, प्रो. समीर मिश्रा, डॉ. सौम्या सिंह, डॉ. अर्पिता, डॉ. ताहिर, डॉ. प्रज्ज्वल, डॉ. महेश, डॉ. धैर्य, डॉ. मोहतास्सिन और डॉ. सागर शामिल थे। फिलहाल सर्वेश की हालत स्थिर है और उसका ब्लड प्रेशर, पल्स और ऑक्सीजन लेवल सामान्य है। वह अभी ICU में डॉक्टरों की निगरानी में है।

KGMU के कुलपति ने पूरी टीम की इस कामयाबी की तारीफ की है। वहीं डॉ. यदुवेंद्र धीर ने आम लोगों के लिए एक जरूरी सलाह दी है। उन्होंने बताया कि अगर किसी की छाती में कोई धारदार हथियार या चाकू धंस जाए, तो उसे अस्पताल पहुंचने से पहले या ऑपरेशन थिएटर के बाहर कभी नहीं निकालना चाहिए। ऐसा इसलिए क्योंकि कई बार वह हथियार ही खून के बहाव को रोकने का काम करता है और उसे निकालने से मरीज की जान को खतरा हो सकता है।