Lucknow: KGMU में कुलपति और कुलसचिव के बीच टकराव तेज, कार्य परिषद ने फैसलों में देरी पर जताई नाराजगी

UP/Lucknow: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में प्रशासनिक खींचतान अब सबके सामने आ गई है। मंगलवार को हुई कार्य परिषद की बैठक में सदस्यों ने फैसलों में हो रही देरी पर अपनी नाराजगी जाहिर की। परिषद ने कुलपति से मांग की

UP/Lucknow: किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) में प्रशासनिक खींचतान अब सबके सामने आ गई है। मंगलवार को हुई कार्य परिषद की बैठक में सदस्यों ने फैसलों में हो रही देरी पर अपनी नाराजगी जाहिर की। परिषद ने कुलपति से मांग की है कि वे स्टाफ के नियमितीकरण और अन्य लंबित मामलों में तुरंत हस्तक्षेप करें ताकि काम सुचारू रूप से चल सके।

विश्वविद्यालय में कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद और कुलसचिव अर्चना गहरवार के बीच तालमेल की कमी साफ दिख रही है। जुलाई महीने में दोनों के बीच टकराव की कई खबरें आईं। कुलपति ने कुलसचिव द्वारा जारी किए गए कई प्रशासनिक आदेशों को रद्द कर दिया। इसमें 20 जुलाई को फार्माकोलॉजी विभाग की वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शिखा त्रिपाठी के ट्रांसफर ऑर्डर को निरस्त करना और 14 जुलाई को कार्यवाहक कुलसचिव के अधिकारों को सीमित करने वाले आदेश को रद्द करना शामिल है। इस खींचतान के बाद कुलसचिव ने चिकित्सा शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष से शिकायत की थी।

प्रशासनिक विवादों के बीच कुलपति पर गंभीर आरोप भी लगे हैं। 23 जुलाई को करोड़ों रुपये के टेंडर नवीनीकरण में नियमों की अनदेखी का मामला सामने आया। आरोप है कि बिना नए टेंडर के ही पुराने अनुबंध को नवीनीकृत कर दिया गया। इस मामले की जांच के आदेश अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष ने 8 मई 2026 को ही दे दिए थे। साथ ही विधान परिषद सदस्य शैलेंद्र प्रताप सिंह ने भी इस संबंध में राज्यपाल को पत्र लिखकर हस्तक्षेप की मांग की थी।

संस्थान में कर्मचारियों से जुड़े मुद्दे भी लंबे समय से चल रहे हैं। फरवरी 2026 में तदर्थ कर्मचारियों को बिना नियमितीकरण के पेंशन और वित्तीय लाभ देने के मामले की जांच के लिए डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने एक समिति बनाई थी। इसके अलावा जून 2026 में महंगी दवाओं के दुरुपयोग के मामले में कुछ संविदा कर्मचारियों को हटाया गया था। इस पूरी खींचतान का सीधा असर यूनिवर्सिटी की निर्णय प्रक्रिया और प्रशासनिक तालमेल पर पड़ रहा है।