Dengue के खतरे को समय से पहले पहचानेंगे डॉक्टर, Kerala के शोधकर्ताओं ने शुरू की नई स्टडी
Kerala: डेंगू के मरीजों की जान बचाने के लिए अब एक नई तकनीक पर काम हो रहा है। Kerala के Institute of Advanced Virology के शोधकर्ता एक ऐसी स्टडी कर रहे हैं जिससे यह पता चल सके कि किस मरीज की हालत गंभीर हो सकती है। इसके लिए
Kerala: डेंगू के मरीजों की जान बचाने के लिए अब एक नई तकनीक पर काम हो रहा है। Kerala के Institute of Advanced Virology के शोधकर्ता एक ऐसी स्टडी कर रहे हैं जिससे यह पता चल सके कि किस मरीज की हालत गंभीर हो सकती है। इसके लिए 2,000 डेंगू मरीजों पर रिसर्च की जा रही है ताकि बीमारी के गंभीर होने से पहले ही उसके संकेतों को पहचाना जा सके।
अक्सर डेंगू में उल्टी, पेट दर्द या कमजोरी जैसे लक्षण तब दिखते हैं जब शरीर के अंदर समस्या काफी बढ़ चुकी होती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए वैज्ञानिक ‘बायोमार्कर’ यानी खून में मौजूद खास प्रोटीन की जांच कर रहे हैं। एक शुरुआती ट्रायल में 150 मरीजों के सैंपल लिए गए थे, जिसमें यह देखा गया कि जब बीमारी खतरनाक मोड़ लेती है, तो कुछ खास प्रोटीन का स्तर बढ़ जाता है। कंप्यूटर मॉडल के जरिए इन मामलों का सटीक अंदाजा लगाया गया।
इस बड़े रिसर्च के लिए Institute of Advanced Virology ने Kerala के तीन बड़े मेडिकल कॉलेजों—Believers’ Church, Pushpagiri और Government Medical College, Thiruvananthapuram के साथ समझौता किया है। साथ ही, इस काम में National University of Singapore की टीम भी मदद कर रही है ताकि सही बायोमार्कर की पहचान की जा सके।
एक्सपर्ट Agiesh Kumar B के मुताबिक, एक ऐसे सस्ते टेस्ट की जरूरत है जिसे डॉक्टर अस्पताल में मरीज के पास ही इस्तेमाल कर सकें। इससे यह तय करना आसान होगा कि किस मरीज को तुरंत भर्ती करने और कड़ी निगरानी की जरूरत है। इस कोशिश का मकसद डेंगू के प्रकोप के दौरान स्वास्थ्य सेवाओं और संसाधनों का सही इस्तेमाल करना है ताकि ज्यादा से ज्यादा जान बचाई जा सकें।