दुनिया भर के मुसलमान सड़क पर, इस बड़े फ़ैसले के बाद मुस्लिम समाज ने कहा ये कुछ नहि बस हत्या हैं

इजरायल की संसद नेसेट ने गुरुवार को विवादित ‘ज्यूस नेशन बिल’ को पेश किया. जिसमें इजरायल को एक “यहूदी राष्ट्र” घोषित किया गया है.  इतना ही नहीं अरबी से भी देश की एक आधिकारिक भाषा का दर्जा छिन गया है. साथ इसरायली संसद में कहा गया की इजराइल की राजधानी “जेरूसलम’ है.

 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल के इस एक तरफा बिल को लेकर तेल-अवीव में हज़ारों लोगों ने इस बिल के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया और इसे नस्लभेदी क़रार दिया.

 

 

बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल की 90 लाख की आबादी में 20% (18 लाख) अरब (मुस्लिम) रहते हैं. इजरायल के कानून के मुताबिक, अरबों को भी वहां यहूदियों की तरह ही अधिकार दिए गए हैं लेकिन वे लंबे समय से दोयम दर्जे के नागरिकों की तरह बर्ताव होने और भेदभाव की शिकायतें करते रहे है. अरबों का कहना है कि यह लोकतंत्र की हत्या है.

 

आपको बता दें की पिछले साल दिसम्बर में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जेरूसलम को इजराइल की राजधानी घोषित किया था. जिसके बाद दुनिया के मुस्लिम देशों और गेर-मुसल्म देशों में ट्रम्प के इस फैसले खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुआ था. यूनाइटेड नेशन में वोटिंग भी फिलिस्तीन के समर्थन में ही हुयी थी 128 देशों ने ट्रूम के फैसले का विरोध करके जेरुसालेम को फलिस्तीन की राजधानी के रूप में मान्यता देने के समर्थन में वोट दिया था.

 

 

आपको बता दें कि 1967 के बाद ने इजराइल ने अवैध तरीके से फिलिस्तीनी ज़मीन पर कब्जा करना शुरू किया. जो अभी तक जारी है. इजराइल फिलिस्तीनी ज़मीन पर अवैध यहूदी बस्तियों का निर्माण कर रहा है.

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