Karnataka में फ्लैट मालिकों को मिलेंगे कॉमन एरिया के अधिकार, सरकार ने तैयार किया नया ड्राफ्ट बिल
Karnataka: कर्नाटक सरकार ने फ्लैट मालिकों के हक की रक्षा के लिए ‘कर्नाटक अपार्टमेंट (ओनरशिप एंड मैनेजमेंट) बिल, 2026’ का ड्राफ्ट जारी किया है। इस नए कानून का मकसद फ्लैट मालिकों को कॉमन एरिया पर मजबूत अधिकार द
Karnataka: कर्नाटक सरकार ने फ्लैट मालिकों के हक की रक्षा के लिए ‘कर्नाटक अपार्टमेंट (ओनरशिप एंड मैनेजमेंट) बिल, 2026’ का ड्राफ्ट जारी किया है। इस नए कानून का मकसद फ्लैट मालिकों को कॉमन एरिया पर मजबूत अधिकार देना और अपार्टमेंट में रहने वालों के लिए एक साफ कानूनी ढांचा तैयार करना है। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने नागरिकों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन से 6 अगस्त तक इस ड्राफ्ट पर अपने सुझाव भेजने को कहा है।
यह नया बिल 1972 के पुराने कानूनों (KAOA और KOFA) की जगह लेगा ताकि बिल्डरों और फ्लैट मालिकों के बीच सालों से चल रहे विवाद खत्म हो सकें। इस बिल के तहत प्रोजेक्ट की जमीन और कॉमन एरिया का मालिकाना हक सामूहिक रूप से फ्लैट मालिकों को ट्रांसफर करना अनिवार्य होगा। पुराने प्रोजेक्ट्स के लिए ‘डीम्ड कन्वेयेंस’ का प्रावधान रखा गया है, जहां पहले मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं हुआ था।
| मुख्य प्रावधान | विवरण |
|---|---|
| पुनर्विकास (Redevelopment) | किसी भी बदलाव के लिए कम से कम 75% मालिकों की सहमति जरूरी होगी। |
| मुआवजा | जो मालिक पुनर्विकास में शामिल नहीं होना चाहेंगे, उन्हें मार्केट वैल्यू से दोगुना मुआवजा मिलेगा। |
| स्ट्रक्चरल ऑडिट | 30 साल से पुराने अपार्टमेंट्स के लिए सेफ्टी ऑडिट अनिवार्य होगा, जो हर 5 साल में कराना होगा। |
| विवाद निपटारा | विवादों को सुलझाने के लिए सिविल कोर्ट जैसी शक्तियों वाला एक सक्षम प्राधिकरण बनाया जाएगा। |
| मेंटेनेंस चार्ज | चार्ज की गणना सुपर बिल्ट-अप एरिया के अनुपात में की जाएगी। |
| बिल्डर की जवाबदेही | बिल्डर को सभी ओरिजिनल दस्तावेज और बचा हुआ मेंटेनेंस फंड एसोसिएशन को सौंपना होगा। |
| पार्किंग नियम | कॉमन पार्किंग एरिया को अलग से बेचना मना होगा। |
यह कानून उन अपार्टमेंट प्रोजेक्ट्स पर लागू होगा जिनमें 8 से ज्यादा यूनिट्स हैं। मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार ने कहा कि सरकार का लक्ष्य होमबायर्स को पूरा मालिकाना हक दिलाना है ताकि उन्हें लंबे समय तक कोर्ट के चक्कर न काटने पड़ें। वहीं, बेंगलुरु विकास मंत्री कृष्ण बायरे गौड़ा ने इसे गवर्नेंस को सुधारने वाला कदम बताया है। कर्नाटक होम बायर्स फोरम और CREDAI कर्नाटक जैसे संगठनों ने भी इस पहल पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। इस बिल को 6 अगस्त से शुरू होने वाले मानसून सत्र में पेश किए जाने की उम्मीद है।