Delhi Police पर अपहरण का आरोप, CJP प्रोटेस्ट में खाना बांटने वाले युवक ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया

Delhi/UP: जंतर मंतर पर चल रहे Cockroach Janta Party (CJP) के विरोध प्रदर्शन में खाने-पानी की व्यवस्था करने वाले जुनैद मलिक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। जुनैद का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनका अपहरण किया, उनसे

Delhi/UP: जंतर मंतर पर चल रहे Cockroach Janta Party (CJP) के विरोध प्रदर्शन में खाने-पानी की व्यवस्था करने वाले जुनैद मलिक ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। जुनैद का आरोप है कि दिल्ली पुलिस ने उनका अपहरण किया, उनसे पूछताछ की और फिर उन्हें देहरादून के पास छोड़ दिया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस दौरान उनके परिवार को भी परेशान किया गया।

वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कि जुनैद मलिक को 24 जुलाई 2026 की रात तब पकड़ा गया जब वे डॉ. राम मनोहर लोहिया अस्पताल से लौट रहे थे। आरोप है कि पुलिस ने उनकी आंखों पर पट्टी बांधी और उनसे विरोध प्रदर्शन के लिए आने वाले फंड के बारे में पूछताछ की। इसके अलावा, जुनैद के परिवार पर दबाव बनाने के लिए यूपी पुलिस ने गाजियाबाद और मेरठ में उनके घर पर छापेमारी की और उनके पिता समेत अन्य रिश्तेदारों को हिरासत में लेकर पूछताछ की।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए कहा कि नीट छात्रों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई की निष्पक्ष जांच जरूरी है। कोर्ट ने माना कि हिंसा का मामला सामने आया है और इसके लिए एक स्वतंत्र जांच की जरूरत है। चीफ जस्टिस सूर्य कांत ने साफ कहा कि जिस किसी ने भी कानून अपने हाथ में लिए हैं या सख्ती की है, उन्हें सजा मिलनी चाहिए। कोर्ट अब विरोध प्रदर्शनों से निपटने के लिए एक नया प्रोटोकॉल बनाने और पूर्व जज की निगरानी में एक स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाने पर विचार कर रहा है।

दूसरी तरफ, केंद्र सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इस याचिका का विरोध किया। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन के दौरान 250 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए थे और यह हिंसा कुछ बाहरी तत्वों की वजह से हुई थी। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि जुनैद का मामला अलग है और वह इस मामले में पीड़ित नहीं हैं।

बता दें कि CJP 20 जून 2026 से जंतर मंतर पर प्रदर्शन कर रहा है और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहा है। दिल्ली में फिलहाल धारा 163 के तहत पाबंदियां लागू हैं, जिसके तहत बिना अनुमति के भीड़ जमा करना या मार्च निकालना मना है।