Lucknow में ‘एक देश-एक चुनाव’ पर JPC का मंथन, 15 जुलाई तक अधिकारियों और विशेषज्ञों से होगी चर्चा

UP/Lucknow : देश में ‘एक देश-एक चुनाव’ लागू करने की तैयारी के बीच संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने लखनऊ में अपना तीन दिवसीय दौरा शुरू किया है। यह समिति 13 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक शहर में रुककर विभिन्न पक्षों स

UP/Lucknow : देश में ‘एक देश-एक चुनाव’ लागू करने की तैयारी के बीच संयुक्त संसदीय समिति (JPC) ने लखनऊ में अपना तीन दिवसीय दौरा शुरू किया है। यह समिति 13 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक शहर में रुककर विभिन्न पक्षों से बात करेगी। इसका मुख्य मकसद संविधान (129वां संशोधन) विधेयक, 2024 की समीक्षा करना और यह समझना है कि इसे जमीन पर कैसे लागू किया जा सकता है।

सोमवार को समिति ने अपने दौरे की शुरुआत की और प्रशासनिक व कानूनी पहलुओं पर चर्चा की। इस दौरान JPC ने उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव एस.पी. गोयल, डीजीपी राजीव कृष्ण और मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा से मुलाकात की। इसके अलावा वित्त, गृह, शिक्षा, कृषि और स्वास्थ्य जैसे 8 बड़े विभागों के अधिकारियों के साथ-साथ कोल इंडिया, पावर ग्रिड और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया जैसे सार्वजनिक उपक्रमों के प्रतिनिधियों से भी राय ली गई।

मंगलवार को समिति का कार्यक्रम राजनीतिक दलों और कारोबारी संगठनों के साथ बैठकों का है। दिन के अंत में सदस्य राज्यपाल से भी मुलाकात करेंगे। वहीं बुधवार को लखनऊ विश्वविद्यालय, आईआईएम लखनऊ, आईआईटी कानपुर और बीएचयू जैसे बड़े शिक्षण संस्थानों के विशेषज्ञों से चर्चा की जाएगी।

समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी ने बताया कि अब तक जिन नागरिक समाज के लोगों से बात हुई, उनमें से करीब 99% ने इस प्रस्ताव का समर्थन किया है। उन्होंने यह भी कहा कि कई पूर्व मुख्य न्यायाधीशों और संवैधानिक विशेषज्ञों का मानना है कि यह व्यवस्था लोकतंत्र के खिलाफ नहीं है। इस बदलाव से बार-बार होने वाले चुनावों में होने वाले करीब 7 लाख करोड़ रुपये के खर्च को बचाया जा सकेगा।

सांसद अनुराग ठाकुर ने बताया कि बार-बार आदर्श आचार संहिता लागू होने से सरकारी काम रुक जाते हैं, जिससे शासन व्यवस्था पर असर पड़ता है। समिति 17 जुलाई 2026 तक अपनी रिपोर्ट तैयार कर संसद में पेश करेगी। उम्मीद है कि इस व्यवस्था को 2029 के आम चुनावों तक पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा।