Delhi के JNU में बराक हॉस्टल की सीटों को लेकर बवाल, नॉर्थ ईस्ट के छात्रों ने किया प्रदर्शन

Delhi: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के कैंपस में बराक हॉस्टल की सीटों के आरक्षण को लेकर विवाद बढ़ गया है। नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स फोरम (NESF) के नेतृत्व में छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया है। छात्रों की मुख्

Delhi: जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) के कैंपस में बराक हॉस्टल की सीटों के आरक्षण को लेकर विवाद बढ़ गया है। नॉर्थ ईस्ट स्टूडेंट्स फोरम (NESF) के नेतृत्व में छात्रों ने प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया है। छात्रों की मुख्य मांग है कि नए बराक हॉस्टल की 75% सीटें उत्तर-पूर्वी राज्यों के छात्रों के लिए सुरक्षित रखी जाएं।

यह विवाद 7 अप्रैल 2025 को तब शुरू हुआ जब यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर और अन्य अधिकारियों ने बराक हॉस्टल का उद्घाटन किया। इस दौरान NESF के छात्रों ने मौन विरोध प्रदर्शन किया। विवाद तब और गहरा गया जब 8 अप्रैल को महिला PhD छात्रों की अलॉटमेंट लिस्ट जारी हुई। छात्रों का आरोप है कि डीन ऑफ स्टूडेंट्स ने पहले भरोसा दिया था कि बिना चर्चा के कोई लिस्ट जारी नहीं होगी, लेकिन प्रशासन ने ऐसा नहीं किया।

इस मामले पर JNU की वाइस चांसलर प्रोफेसर संतोष्री धुलीपुडी पंडित ने साफ कहा कि बराक हॉस्टल में कोई आरक्षण नहीं होगा। उन्होंने कहा कि JNU भारत के संविधान का पालन करती है और कैंपस में किसी भी पहचान का अलगाव नहीं होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर छात्र मीटिंग के मिनट्स की मांग पर अड़े रहे, तो हॉस्टल को प्रशासनिक ब्लॉक में बदला जा सकता है।

दूसरी तरफ, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने बताया कि हालांकि यह हॉस्टल किसी खास क्षेत्र के लिए नहीं है, लेकिन उन्हें मिनिस्ट्री ऑफ डेवलपमेंट ऑफ नॉर्थ ईस्टर्न रीजन (DoNER) से उत्तर-पूर्वी छात्रों को प्राथमिकता देने के निर्देश मिले थे। प्रशासन का यह भी कहना है कि उत्तर-पूर्व के सभी छात्रों को पहले से ही अन्य हॉस्टलों में जगह दी गई है।

छात्रों का दावा है कि 2016 में JNU और नॉर्थ ईस्टर्न काउंसिल (NEC) के बीच एक समझौता (MoU) हुआ था, जिसमें 75:25 के अनुपात में सीटों के बंटवारे की बात कही गई थी। DoNER मंत्रालय ने भी पहले यह स्पष्ट किया था कि MoU के मुताबिक 75% सीटें उत्तर-पूर्व के छात्रों के लिए होनी चाहिए। इस पूरे विवाद में NESF ने JNU स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) और अन्य राजनीतिक समूहों पर भी नाराजगी जताई है कि उन्होंने इस समझौते के बावजूद छात्रों से चर्चा नहीं की।