Delhi: Jamia Millia Islamia (JMI) के Centre for Theoretical Physics ने IUCAA के साथ मिलकर ‘Cross-Survey Cosmography’ पर एक चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की शुरुआत की। इस कार्यक्रम में दुनिया भर के बड़े
Delhi: Jamia Millia Islamia (JMI) के Centre for Theoretical Physics ने IUCAA के साथ मिलकर ‘Cross-Survey Cosmography’ पर एक चार दिवसीय अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस की शुरुआत की। इस कार्यक्रम में दुनिया भर के बड़े वैज्ञानिक और एक्सपर्ट जुटे हैं। यहाँ मुख्य रूप से ब्रह्मांड की बनावट, उसकी सटीक माप और अंतरिक्ष से जुड़ी नई खोजों पर बातचीत की जा रही है।
कॉन्फ्रेंस में कौन-कौन से संस्थान शामिल हुए?
इस कार्यक्रम में भारत और विदेश के कई बड़े शिक्षण संस्थानों के लोग हिस्सा ले रहे हैं। इसमें JMI के अलावा भारत के अन्य प्रमुख संस्थानों की भागीदारी रही:
- Indian Institute of Technology (IIT)
- Tata Institute of Fundamental Research (TIFR)
- Jawaharlal Nehru University (JNU)
- University of Delhi
- BITS Pilani
वहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर Space Telescope Science Institute (STScI), University of Cambridge, University of California Berkeley, University of Birmingham, University of Sheffield और University of Tartu (Estonia) जैसे संस्थानों के विशेषज्ञ शामिल हुए हैं।
इस कॉन्फ्रेंस का मुख्य मकसद क्या है?
यह कॉन्फ्रेंस 8 अप्रैल से 11 अप्रैल 2026 तक चली। इसका मुख्य उद्देश्य आधुनिक कॉस्मोलॉजी की चुनौतियों पर चर्चा करना था। वैज्ञानिक इस बात पर गौर कर रहे हैं कि ब्रह्मांड की माप में जो अंतर दिख रहे हैं, क्या वे किसी नई फिजिक्स की ओर इशारा करते हैं।
जामिया के कुलपति ने क्या कहा?
JMI के कुलपति प्रो. मजहर आसिफ ने इस मौके पर आध्यात्मिक और दार्शनिक विचार रखे। उन्होंने कहा कि कॉस्मोलॉजी में दिखने वाले तनाव या अंतर इस बात का संकेत हो सकते हैं कि हमारी वर्तमान समझ या औजार सीमित हैं। उन्होंने जोर दिया कि नई फिजिक्स की खोज असल में सृष्टि के सामंजस्य को गहराई से समझने का एक जरिया है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य सिर्फ पढ़ाई तक सीमित न रहकर सृष्टि की गहरी समझ विकसित करना है।