UP: लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित ‘ब्रज की रसोई’ परिसर में सोमवार, 1 जून 2026 से 9 दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन शुरू हुआ है। पद्म विभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य इस कथा का संचालन कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद
UP: लखनऊ के सीतापुर रोड स्थित ‘ब्रज की रसोई’ परिसर में सोमवार, 1 जून 2026 से 9 दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन शुरू हुआ है। पद्म विभूषण जगद्गुरु रामभद्राचार्य इस कथा का संचालन कर रहे हैं। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय संस्कृति और संस्कारों को जन-जन तक पहुँचाना है ताकि देश को राममय बनाया जा सके।
रामकथा का समय और मुख्य उद्देश्य क्या है?
यह श्रीराम कथा 1 जून से शुरू होकर 9 जून 2026 तक चलेगी। जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि राम केवल पूजा की वस्तु नहीं बल्कि जीवन जीने का एक आदर्श हैं। उनका मानना है कि इस कथा के जरिए युवाओं को एकजुट किया जाएगा, जिससे प्रधानमंत्री मोदी के विकसित भारत के सपने को पूरा करने में मदद मिलेगी। उन्होंने जोर दिया कि जब समाज में भक्ति, सहानुभूति और राष्ट्र के प्रति समर्पण बढ़ेगा, तभी इस कथा का असली अर्थ निकलेगा।
कार्यक्रम में कौन लोग शामिल हो रहे हैं?
इस आयोजन के मुख्य आयोजक MLA डॉ. नीरज बोरा हैं, जिन्होंने उद्घाटन के समय गुरुपद पूजन किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने की संभावना है, जिन्होंने पहले इस कथा का पोस्टर भी जारी किया था। इसके अलावा योगी सरकार के कई मंत्री और विभिन्न सामाजिक व धार्मिक संगठनों के प्रतिनिधि भी इस 9 दिवसीय आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं।
भविष्य की योजनाएं और पहले दिन की चर्चा
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने इस मौके पर एक बड़ी घोषणा की है। उन्होंने बताया कि 14 जनवरी 2027 से चित्रकूट में एक ‘गुरुकुलम’ की स्थापना की जाएगी। यहाँ से पूरी दुनिया को ऑनलाइन संस्कृत शिक्षा दी जाएगी ताकि भारतीय भाषा और संस्कृति का प्रसार हो सके। कथा के पहले दिन उन्होंने पंचवटी प्रसंग और नवधा भक्ति के बारे में विस्तार से बताया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
लखनऊ में श्रीराम कथा कब तक चलेगी?
जगद्गुरु रामभद्राचार्य द्वारा संचालित यह श्रीराम कथा 1 जून 2026 से शुरू हुई है और 9 जून 2026 तक सीतापुर रोड स्थित ‘ब्रज की रसोई’ परिसर में चलेगी।
चित्रकूट गुरुकुलम की शुरुआत कब से होगी?
जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने घोषणा की है कि चित्रकूट में गुरुकुलम की शुरुआत 14 जनवरी 2027 से होगी, जहाँ वैश्विक स्तर पर ऑनलाइन संस्कृत शिक्षा दी जाएगी।