Israel और Lebanon के बीच हुआ समझौता, अमेरिका की मदद से बॉर्डर पर शांति की कोशिश
World: Israel और Lebanon ने अमेरिका की मध्यस्थता में एक फ्रेमवर्क समझौते पर साइन किए हैं। इस डील का मकसद दोनों देशों के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने के खतरे को कम करना और बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ाना है। यह समझौता वाशिंगटन में
World: Israel और Lebanon ने अमेरिका की मध्यस्थता में एक फ्रेमवर्क समझौते पर साइन किए हैं। इस डील का मकसद दोनों देशों के बीच फिर से लड़ाई शुरू होने के खतरे को कम करना और बॉर्डर पर सुरक्षा बढ़ाना है। यह समझौता वाशिंगटन में चार दिनों तक चली लंबी बातचीत के बाद हुआ है।
इस समझौते पर 26 जून 2026 को Israel के राजदूत Yechiel Leiter और Lebanon के राजदूत Nada Hamadeh Moawad ने साइन किए। इस दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio वहां मौजूद थे। Rubio ने इस डील को स्थायी शांति की दिशा में एक शुरुआती कदम बताया। उन्होंने कहा कि इससे Lebanon की संप्रभुता वापस आएगी और Hezbollah के हथियारों व उनके नेटवर्क को खत्म किया जाएगा। अमेरिका ने इस मदद के लिए 100 मिलियन डॉलर की मानवीय सहायता और Lebanese Armed Forces के लिए 30 मिलियन डॉलर की राशि देने का ऐलान किया है।
Israel के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu ने इसे एक बड़ी उपलब्धि बताया है। उन्होंने साफ किया कि जब तक Hezbollah से खतरा रहेगा, तब तक Israel दक्षिण Lebanon में एक सुरक्षा क्षेत्र (Security Zone) बनाए रखेगा। वहीं Lebanon के प्रधानमंत्री Nawaf Salam ने कहा कि इस समझौते से Israel की सेना Lebanon की जमीन से पूरी तरह बाहर निकलेगी और वहां की सरकार का कंट्रोल वापस आएगा। उन्होंने जोर दिया कि केवल सरकारी सेना को ही हथियार रखने की इजाजत होगी।
दूसरी तरफ, Iran समर्थित समूह Hezbollah ने इस समझौते को पूरी तरह खारिज कर दिया है। Hezbollah नेता Naim Qassem ने इसे एक नाटक बताया और कहा कि वे अपने हथियार नहीं छोड़ेंगे। उनके सांसद Hassan Fadlallah ने चेतावनी दी कि अगर Lebanon सरकार ने इसे लागू करने की कोशिश की, तो वहां गृह युद्ध छिड़ सकता है। Hezbollah का कहना है कि वे केवल लिटानी नदी के दक्षिणी इलाके में हथियार छोड़ने को तैयार हैं, पूरे देश में नहीं।
इस डील के तहत एक त्रिपक्षीय सैन्य समन्वय समूह (MCG4L) बनाया जाएगा, जो इस पूरे काम की निगरानी करेगा। कुछ ‘पायलट जोन’ भी बनाए जाएंगे जहां से Israeli सेना हटेगी और वहां केवल Lebanon की सरकारी सेना तैनात रहेगी। हालांकि, Israel ‘येलो लाइन’ के पास करीब 10 किलोमीटर तक के इलाके में अपना कंट्रोल रखेगा ताकि सुरक्षा बनी रहे।