Iran और US में बढ़ा तनाव, Strait of Hormuz पर छिड़ी जंग; दुनिया भर में बढ़ सकते हैं पेट्रोल-डीजल के दाम
World: ईरान और अमेरिका के बीच Strait of Hormuz (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) को लेकर विवाद गहरा गया है। ईरान ने साफ कह दिया है कि इस समुद्री रास्ते पर सिर्फ उसी का कब्जा है और वह तय करेगा कि इसे कब खोलना है और कब बंद करना है। दूस
World: ईरान और अमेरिका के बीच Strait of Hormuz (हॉर्मुज जलडमरूमध्य) को लेकर विवाद गहरा गया है। ईरान ने साफ कह दिया है कि इस समुद्री रास्ते पर सिर्फ उसी का कब्जा है और वह तय करेगा कि इसे कब खोलना है और कब बंद करना है। दूसरी तरफ अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे अमेरिकी नियंत्रण में लेने की बात कही है, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई रुकने और ईंधन की कीमतें बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है।
ईरान के डिप्टी विदेश मंत्री काзем गरीबबादी ने 15 अगस्त 2026 को कहा कि यह रास्ता हमेशा से ईरानी रहा है और किसी ट्वीट या एयरक्राफ्ट कैरियर के जरिए इसे छीना नहीं जा सकता। ईरान के सैन्य कमांड के प्रवक्ता इब्राहिम ज़ोल्फगारी ने भी अमेरिका के दावों को झूठ बताया है। ईरान ने साफ किया है कि उसकी अनुमति के बिना कोई भी कमर्शियल जहाज यहाँ से नहीं गुजर सकता।
इस तनाव का असर अब जहाजों पर भी दिखने लगा है। 14 अगस्त 2026 की शाम को अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के एक जहाज पर हमला हुआ, जिसकी निंदा कतर, कुवैत, मिस्र और बहरीन ने की है। जुलाई की शुरुआत से अब तक इस इलाके में करीब 20 हमलों की खबरें आई हैं। इस वजह से जहाजों की आवाजाही 90 प्रतिशत तक कम हो गई है। सऊदी अरब के कई टैंकर अब लंबा रास्ता तय कर के जा रहे हैं, जिससे समय और खर्चा दोनों बढ़ रहे हैं।
अमेरिका की तरफ से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे जल्द ही अमेरिकी क्षेत्र घोषित करने का संकेत दिया था, हालांकि व्हाइट हाउस के एक अधिकारी ने बाद में इसे मजाक बताया। अमेरिकी ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने ईरान को ऐसी आर्थिक घेराबंदी की धमकी दी है जो दुनिया ने पहले कभी नहीं देखी। वहीं उपराष्ट्रपति JD वेंस ने कहा कि अमेरिका की पहली प्राथमिकता अपने नागरिकों के लिए तेल और गैस की कीमतों को कम करना है।
ईरान ने इस रास्ते को दोबारा खोलने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं। ईरान चाहता है कि अमेरिका युद्ध बंद करे, अपना नौसैनिक घेरा हटाए, इलाके से सेना वापस ले ले, युद्ध के नुकसान की भरपाई करे और जब्त की गई संपत्तियों को वापस करे। फिलहाल ओमान दोनों पक्षों के बीच बातचीत कराने की कोशिश कर रहा है।