Strait of Hormuz पर ईरान और अमेरिका के बीच तनाव, 60 दिन में समझौता करने की कोशिश

World : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच खींचतान जारी है। स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के बाद भी ईरान अपने रुख पर अड़ा हुआ है। इस मामले को सुलझाने के लिए

World : दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक Strait of Hormuz को लेकर ईरान और अमेरिका के बीच खींचतान जारी है। स्विट्जरलैंड में हुई बातचीत के बाद भी ईरान अपने रुख पर अड़ा हुआ है। इस मामले को सुलझाने के लिए कतर और पाकिस्तान बीच-बचाव कर रहे हैं ताकि 60 दिनों के अंदर एक अंतिम समझौता हो सके।

हाल ही में हुई बातचीत के दौरान दोनों देशों ने एक सीधा कम्युनिकेशन चैनल बनाया है। इसका मकसद यह है कि समुद्र में चलने वाले व्यापारिक जहाजों को लेकर किसी तरह का भ्रम न रहे और कोई बड़ी घटना न हो। ईरान ने फिलहाल व्यापारिक जहाजों को बिना किसी टोल के सुरक्षित रास्ता देने का वादा किया है। हालांकि, ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने साफ कर दिया है कि Strait of Hormuz की स्थिति अब युद्ध से पहले जैसी नहीं रहेगी और इसका प्रबंधन अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ईरान ही करेगा।

इस पूरे विवाद की जड़ लेबनान में इजरायली हमलों और अमेरिका की शर्तों को लेकर है। 20 जून 2026 को ईरान ने इस रास्ते को पूरी तरह बंद करने की धमकी दी थी। जवाब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा था कि अगर 60 दिनों में डील नहीं हुई, तो अमेरिका इस रास्ते का नियंत्रण अपने हाथ में ले लेगा या फिर टोल वसूल करेगा।

समझौते के तहत कुछ अहम शर्तें तय की गई हैं:

शर्त/विवरण समय सीमा/जानकारी
अंतिम समझौते की डेडलाइन 60 दिन (बढ़ाया जा सकता है)
माइन हटाना (Demining) 30 दिन के भीतर शुरू करना होगा
तेल प्रतिबंध 21 अगस्त तक ईरान के तेल उत्पादन और बिक्री पर रोक हटी
IAEA निरीक्षण ईरान ने निरीक्षकों को अनुमति देने का वादा किया
प्रबंधन चर्चा ईरान और ओमान के बीच भविष्य की बातचीत तय

फिलहाल जहाजों के लिए अलग-अलग गाइडलाइंस जारी हुई हैं। ईरान ने जहाजों को सलाह दी है कि वे पहले अनुमति लें और ईरानी तट के करीब चलें। वहीं अमेरिका और पश्चिमी बीमा कंपनियों ने जहाजों को ओमान की तरफ से अमेरिकी हवाई सुरक्षा वाले रूट का इस्तेमाल करने को कहा है। इस तनाव का सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर पड़ सकता है, जिससे भारत समेत दुनिया भर के आम लोगों की जेब पर असर पड़ना तय है।