World: ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर टोल वसूलने की तैयारी शुरू की है। इस 500 अरब डॉलर के बड़े प्रोजेक्ट को देखते हुए खाड़ी देशों में हलचल तेज हो गई है। सऊ
World: ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में से एक ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ पर टोल वसूलने की तैयारी शुरू की है। इस 500 अरब डॉलर के बड़े प्रोजेक्ट को देखते हुए खाड़ी देशों में हलचल तेज हो गई है। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) अब ऐसे बाईपास रास्ते तैयार कर रहे हैं जिससे उन्हें ईरान के प्रभाव वाले इस समुद्री रास्ते पर निर्भर न रहना पड़े। अगर ईरान अपने टोल प्लान को लागू करता है तो इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेल की कीमतों में बड़ा बदलाव आ सकता है।
ईरान का टोल प्लान क्या है और क्यों बढ़ी है चिंता?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक ऐसा समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का करीब 30 प्रतिशत कच्चा तेल जहाजों के जरिए गुजरता है। ईरान का दावा है कि वह इस रास्ते की सुरक्षा के लिए बहुत संसाधन खर्च करता है, इसलिए वह यहां से गुजरने वाले कमर्शियल जहाजों से टैक्स वसूलना चाहता है। इस फैसले से पूरी दुनिया में सप्लाई चेन पर असर पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह खबर अहम है क्योंकि हमारी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर आता है। ईरान के इस कदम को खाड़ी में अपना दबदबा बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।
सऊदी अरब और UAE कैसे दे रहे हैं इस चुनौती का जवाब?
ईरान की इस योजना को फेल करने के लिए सऊदी अरब और यूएई ने वैकल्पिक रास्तों पर तेजी से काम करना शुरू कर दिया है। इन देशों की कोशिश है कि तेल की सप्लाई के लिए होर्मुज के रास्ते पर निर्भरता कम की जाए।
- سऊदी अरब अपनी ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन की क्षमता को बढ़ा रहा है ताकि तेल को सीधे लाल सागर तक भेजा जा सके।
- यूएई अपने फुजैराह पोर्ट का विस्तार कर रहा है जो सीधे हिंद महासागर में खुलता है और होर्मुज के रास्ते को बाईपास करता है।
- इन देशों ने कई नए पाइपलाइन प्रोजेक्ट्स पर काम शुरू किया है ताकि आपात स्थिति में भी तेल निर्यात न रुके।
- इन प्रोजेक्ट्स के जरिए ईरान के आर्थिक और सामरिक दबाव को कम करने की योजना बनाई गई है।