Iran और US के बीच तनाव बढ़ा, कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ईरान ने किए हमले
World : ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य और रडार ठिकानों पर किए गए
World : ईरान और अमेरिका के बीच चल रहा विवाद अब और गहरा गया है। ईरान ने कुवैत और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए हैं। यह कार्रवाई अमेरिका द्वारा ईरान के सैन्य और रडार ठिकानों पर किए गए हमलों के जवाब में की गई है, जिससे दोनों देशों के बीच हुआ युद्धविराम अब खतरे में पड़ गया है।
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने बताया कि उन्होंने कुवैत के अली अल सालेम एयर बेस और बहरीन के पोर्ट सलमान में स्थित अमेरिकी फिफ्थ फ्लीट नेवल बेस को निशाना बनाया। ईरान का दावा है कि इस हमले में आठ महत्वपूर्ण अमेरिकी सैन्य ठिकाने तबाह हो गए हैं। बहरीन में हवाई हमले के सायरन बजे और लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी गई। वहीं कुवैत की सेना ने बताया कि उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने दुश्मन की मिसाइलों और ड्रोन्स को बीच में ही रोक लिया।
यह पूरा मामला शनिवार, 27 जून 2026 को शुरू हुआ जब अमेरिका ने ईरान के निगरानी सिस्टम, संचार केंद्रों और ड्रोन स्टोरेज पर हमले किए। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में पनामा के एक टैंकर ‘किकु’ पर ड्रोन हमले के जवाब में की गई थी। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के मुताबिक, ईरान के हमलों में किसी अमेरिकी सैनिक की जान नहीं गई है और न ही कोई बड़ा नुकसान हुआ है।
इस तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर चेतावनी दी है कि अगर ईरान ने युद्धविराम का पालन नहीं किया, तो अमेरिका इस काम को सैन्य रूप से पूरा करेगा। उन्होंने यहाँ तक कह दिया कि ऐसी स्थिति में ईरान का अस्तित्व खत्म हो सकता है। दूसरी तरफ, ईरान ने आरोप लगाया है कि अमेरिका ने इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (MoU) के नियमों को तोड़ा है। ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर युद्धविराम का उल्लंघन जारी रहा, तो वह सभी राजनयिक प्रक्रियाएं बंद कर देगा।
इस घटना के बाद सऊदी अरब, कतर, मिस्र, यूएई और जॉर्डन ने ईरान की इस कार्रवाई की निंदा की है और बहरीन के साथ अपनी एकजुटता जताई है। फिलहाल होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ा हुआ है, जिससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल की कीमतों पर असर पड़ सकता है, जो अंततः भारत जैसे देशों में आम आदमी की जेब पर असर डालता है।