Haryana के Gurugram और Nuh में बिजली निजीकरण का विरोध, INLD ने उठाए सवाल

Haryana: हरियाणा सरकार गुरुग्राम और नूह में बिजली वितरण के काम को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है, लेकिन इस फैसले का कड़ा विरोध शुरू हो गया है। INLD ने इस कदम को गलत बताते हुए सरकार और नियामक संस्था पर सवाल उठा

Haryana: हरियाणा सरकार गुरुग्राम और नूह में बिजली वितरण के काम को निजी हाथों में सौंपने की तैयारी कर रही है, लेकिन इस फैसले का कड़ा विरोध शुरू हो गया है। INLD ने इस कदम को गलत बताते हुए सरकार और नियामक संस्था पर सवाल उठाए हैं। मामला अब हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) के पास है, जिसने इस पूरी प्रक्रिया की जांच के लिए एक एक्सपर्ट कमेटी बना दी है।

INLD के नेशनल पैट्रन और पूर्व वित्त मंत्री संपत सिंह ने 9 जुलाई 2026 को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा कि सरकारी बिजली कंपनियों के निजीकरण के लिए अदालतों ने कुछ नियम तय किए हैं, जिनमें कंपनी की वित्तीय स्थिति, अनुभव और जनता के हित को देखना जरूरी है। संपत सिंह का आरोप है कि सरकार इन नियमों की अनदेखी कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (DHBVN) की 42% कमाई अकेले गुरुग्राम से होती है और वहां बिजली का नुकसान (line loss) भी बहुत कम है, ऐसे में मुनाफे वाली इकाई को निजी हाथों में देना समझ से बाहर है।

इस पूरे विवाद के केंद्र में Eleven Power Private Limited नाम की कंपनी है, जिसे वितरण लाइसेंस देने का प्रस्ताव है। इस कंपनी को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हुए हैं क्योंकि इसकी शुरुआत जून 2025 में हुई थी और इसकी पेड-अप कैपिटल सिर्फ 1 करोड़ रुपये है, जबकि प्रोजेक्ट की कुल लागत करीब 4,717 करोड़ रुपये बताई गई है।

इस मामले में अलग-अलग पक्षों की राय बंटी हुई है:

  • विरोध करने वाले: INLD के साथ-साथ सरकारी कंपनियां जैसे DHBVN, UHBVN और HVPN ने भी आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इससे सरकारी राजस्व का नुकसान होगा और सब्सिडी ढांचे पर बुरा असर पड़ेगा।
  • समर्थन करने वाले: 7 जुलाई 2026 को हुई एक जनसुनवाई में कुछ उद्योगपतियों, शहरी उपभोक्ताओं और किसानों ने इस कदम का समर्थन किया। उनका मानना है कि इससे बिजली की सप्लाई बेहतर होगी और ग्राहकों के पास विकल्प बढ़ेंगे।

अब हरियाणा बिजली नियामक आयोग (HERC) के चेयरमैन नंद लाल शर्मा के नेतृत्व में तीन सदस्यों की एक स्वतंत्र एक्सपर्ट कमेटी बनाई गई है। आलोक निगम, रविंदर कुमार शर्मा और बिभु प्रसाद महापात्रा की यह कमेटी 13 जुलाई 2026 से अपना काम शुरू करेगी और 15 दिनों के भीतर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी। यह कमेटी देखेगी कि क्या यह प्रस्ताव बिजली अधिनियम 2003 और आयोग के नियमों के हिसाब से सही है या नहीं।