Finance : दिल्ली की कंपनी Inkers Technology ने Kael नाम से एक नया AI प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह भारत का पहला AI-नेटिव कंस्ट्रक्शन इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है। इसका मकसद कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग औ
Finance : दिल्ली की कंपनी Inkers Technology ने Kael नाम से एक नया AI प्लेटफॉर्म लॉन्च किया है। यह भारत का पहला AI-नेटिव कंस्ट्रक्शन इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म है। इसका मकसद कंस्ट्रक्शन और रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग और मॉनिटरिंग के तरीके को पूरी तरह बदलना है। यह सिस्टम प्रोजेक्ट में आने वाले खतरों को पहले ही पहचान लेगा ताकि काम में देरी न हो और पैसा बर्बाद न हो।
Kael प्लेटफॉर्म कैसे काम करेगा और इसके फायदे क्या हैं?
Kael एक प्रेडिक्टिव इंटेलिजेंस लेयर के साथ आता है। यह प्रोजेक्ट टीम को यह बताने में मदद करेगा कि आगे क्या रिस्क आ सकते हैं और उनका पैसों पर क्या असर होगा। इससे मैनेजर समय रहते कदम उठा सकेंगे। शुरुआती नतीजों से पता चला है कि इस प्लेटफॉर्म की मदद से प्रोजेक्ट मैनेजर अपनी रोजाना की रिपोर्टिंग और जरूरी कामों में 3 से 4 घंटे का समय बचा पाएंगे।
कंपनी के अधिकारियों ने इस बारे में क्या कहा?
Inkers Technology के चीफ बिजनेस ऑफिसर Argenio Antao ने बताया कि पूरी दुनिया के कंस्ट्रक्शन सेक्टर में प्रोडक्टिविटी की कमी की वजह से करीब 40 ट्रिलियन डॉलर का नुकसान होता है। Kael अलग-अलग जगहों से मिलने वाले डेटा को एक जगह लाकर सही फैसले लेने में मदद करेगा। वहीं कंपनी के CTO Rohan ने कहा कि यह सिस्टम सिर्फ पुरानी रिपोर्ट नहीं दिखाएगा, बल्कि आने वाले समय के बारे में बताएगा और प्रोजेक्ट को सही दिशा में ले जाएगा।
Observance और Kael का तालमेल क्या है?
कंपनी के पास पहले से ही Observance नाम का एक सिस्टम है जो LiDAR और कंप्यूटर विजन का इस्तेमाल कर साइट का डिजिटल नक्शा तैयार करता है। अब Kael इसके साथ मिलकर काम करेगा। यह दोनों सिस्टम मिलकर साइट पर हो रही हलचल और ऑफिस की रणनीति के बीच के अंतर को खत्म करेंगे, जिससे प्रोजेक्ट पर पूरा कंट्रोल रहेगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Kael प्लेटफॉर्म से कंस्ट्रक्शन प्रोजेक्ट्स में क्या सुधार होगा?
यह प्लेटफॉर्म AI की मदद से प्रोजेक्ट में आने वाले रिस्क और पैसों के नुकसान का पहले ही अंदाजा लगा लेगा, जिससे प्रोजेक्ट समय पर और तय बजट में पूरे हो सकेंगे।
Kael प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करने से समय की कितनी बचत होगी?
शुरुआती जानकारी के मुताबिक, ऑटोमेटेड रिपोर्टिंग और जरूरी इनसाइट्स मिलने से प्रोजेक्ट मैनेजर रोजाना लगभग 3 से 4 घंटे का समय बचा सकते हैं।