हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों पर हमले, सुरक्षा के लिए नए नियम लागू; 4000 नाविक सुरक्षित लौटे

World : हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। हाल के दिनों में इस समुद्री इलाके में जहाजों पर हुए हमलों ने नाविकों की जान जोखिम में डाल दिया है। लखनऊ में शिपिंग विशेषज्ञ कैप्टन संजय पा

World : हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। हाल के दिनों में इस समुद्री इलाके में जहाजों पर हुए हमलों ने नाविकों की जान जोखिम में डाल दिया है। लखनऊ में शिपिंग विशेषज्ञ कैप्टन संजय पाराशर ने इन हमलों को अकारण बताया और कहा कि युद्ध जैसे हालात के बीच देश की अर्थव्यवस्था को चलाने वाले इन नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना अब सबसे बड़ी चुनौती बन गई है।

जुलाई 2026 में यहाँ कई गंभीर घटनाएं हुईं। 12 जुलाई को साइप्रस के जहाज GFS Galaxy पर मिसाइल हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय नाविक की मौत हो गई। इसके बाद 14 जुलाई को अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी के दो टैंकरों, Mombasa B और Al Bahyah पर भी क्रूज मिसाइल से हमला किया गया। इन हमलों में एक और भारतीय नाविक की जान चली गई और 10 अन्य घायल हो गए। इन घटनाओं के बाद भारत सरकार ने कड़ा रुख अपनाया और ईरानी दूतावास के उप प्रमुख को तलब कर विरोध दर्ज कराया।

नाविकों की जान बचाने के लिए मर्चेंट शिपिंग महानिदेशालय (DGMA) ने 16 जुलाई 2026 को सर्कुलर संख्या 36/2026 जारी कर भारतीय नाविकों की तैनाती पर रोक लगा दी थी। हालांकि, 5 अगस्त 2026 को इस प्रतिबंध को हटा लिया गया, लेकिन अब नए और सख्त सुरक्षा नियम लागू किए गए हैं। अब किसी भी भारतीय नाविक को इस क्षेत्र में भेजने से पहले उसकी लिखित सहमति लेनी होगी और इसकी जानकारी भारत के समुद्री निदेशालय को देना अनिवार्य होगा। जहाजों को ISPS कोड प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना होगा और सुरक्षा चेतावनियों पर नजर रखनी होगी।

7 अगस्त 2026 को संसद में पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सरबानंद सोनोवाल ने जानकारी दी कि अब तक 62 भारत की ओर आने वाले जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित निकल चुके हैं। साथ ही, 4,000 से ज्यादा नाविकों को इस खतरनाक क्षेत्र से सुरक्षित वापस लाया गया है। कैप्टन संजय पाराशर ने कहा कि हालांकि सरकार कदम उठा रही है, लेकिन नाविकों को अपना घर चलाने के लिए काम करना पड़ता है, इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए और ज्यादा पुख्ता इंतजाम की जरूरत है।