World : पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और ग्लोबल एनर्जी संकट को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी रणनीति बदली है। अब सेना ईंधन की खपत कम करने के लिए Biogas और Solar Energy जैसे विकल्पों को अपनाएगी। इसका मुख्य मकसद बाहरी देशों
World : पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव और ग्लोबल एनर्जी संकट को देखते हुए भारतीय सेना ने अपनी रणनीति बदली है। अब सेना ईंधन की खपत कम करने के लिए Biogas और Solar Energy जैसे विकल्पों को अपनाएगी। इसका मुख्य मकसद बाहरी देशों पर निर्भरता कम करना और संसाधनों की बचत करना है।
Biogas और Solar Energy से क्या होगा फायदा?
सेना के अधिकारियों ने बताया कि जल्द ही Biogas स्टोव खरीदने की प्रक्रिया शुरू होगी। अभी सेना की यूनिट्स में रोजाना करीब 1,56,000 किलोग्राम LPG इस्तेमाल होती है। Biogas के आने से करीब 20% LPG की बचत होगी, जिससे रोजाना 30,000 किलोग्राम गैस बच सकती है। इसके अलावा, अगले 3 से 5 साल में सोलर और विंड एनर्जी को बड़े स्तर पर लागू करने की योजना है। लद्दाख में NTPC के साथ मिलकर सोलर हाइड्रोजन-आधारित माइक्रोग्रिड का पायलट प्रोजेक्ट अक्टूबर 2024 में ही शुरू किया जा चुका है।
ईंधन बचाने के लिए और क्या कदम उठाए जाएंगे?
सेना ने ईंधन की बचत के लिए कई कड़े कदम उठाने पर चर्चा की है। इसके लिए डिफेंस की करीब 46,000 एकड़ खाली जमीन की पहचान की गई है, जहां सोलर और बायोगैस प्लांट लगाए जाएंगे। साथ ही, कार्बन क्रेडिट पाने के लिए पेड़ भी लगाए जाएंगे।
- रूटीन प्रशासनिक काफिलों (convoy) की दूरी 400 किलोमीटर तक सीमित की जाएगी।
- लंबी दूरी के लिए रेल नेटवर्क का ज्यादा इस्तेमाल होगा।
- गाड़ियों को पूल किया जाएगा ताकि एक ही काम के लिए बार-बार चक्कर न लगाने पड़ें।
- जहां मुमकिन होगा, वहां CNG या इलेक्ट्रिक गाड़ियों का इस्तेमाल बढ़ाया जाएगा।
क्या इससे सैन्य ऑपरेशन पर असर पड़ेगा?
अधिकारियों ने साफ किया है कि ईंधन बचाने के इन उपायों से ऑपरेशनल फ्लाइंग (Operational Flying) पर कोई असर नहीं पड़ेगा। केवल रूटीन फ्लाइट्स को बेहतर तरीके से मैनेज किया जाएगा ताकि ईंधन की बर्बादी कम हो। यह पूरा कदम ईरान युद्ध और पश्चिम एशिया के संकट के कारण बाधित हुई ग्लोबल फ्यूल सप्लाई को देखते हुए उठाया गया है।