World : भारत और ब्रिटेन ने दुनिया को प्रदूषण मुक्त बनाने और Net Zero लक्ष्य को हासिल करने के लिए हाथ मिलाया है। नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और ब्रिटेन के ऊर्जा सुरक्षा मंत्री Ed Miliband के बीच बड़ी बैठक हुई।
World : भारत और ब्रिटेन ने दुनिया को प्रदूषण मुक्त बनाने और Net Zero लक्ष्य को हासिल करने के लिए हाथ मिलाया है। नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल और ब्रिटेन के ऊर्जा सुरक्षा मंत्री Ed Miliband के बीच बड़ी बैठक हुई। इस साझेदारी का मकसद साफ ऊर्जा (Clean Energy) को बढ़ावा देना और आर्थिक विकास की रफ्तार बढ़ाना है, जिससे आम लोगों को सस्ती बिजली और रोजगार के नए मौके मिल सकें।
India-UK एनर्जी डायलॉग में क्या तय हुआ?
3 जून 2026 को नई दिल्ली में चौथे India-UK Energy Dialogue का आयोजन हुआ। इस बैठक में बिजली वितरण, सेक्टर सुधार और इलेक्ट्रिक गाड़ियों (Electric Mobility) को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। दोनों देशों ने तय किया कि ऊर्जा परिवर्तन ऐसा हो जिससे विकास भी हो और बिजली की कीमतें भी आम आदमी की पहुंच में रहें। साथ ही, ASPIRE प्रोग्राम के दूसरे चरण की शुरुआत की गई है, जो चौबीसों घंटे बिजली सप्लाई और इंडस्ट्रियल डीकार्बोनाइजेशन में तकनीकी मदद देगा।
क्रिटिकल मिनरल्स और निवेश पर क्या है अपडेट?
4 जून 2026 को भारत और ब्रिटेन ने Critical Minerals Global Supply Chain Observatory (GSCO) लॉन्च किया। यह कदम इसलिए जरूरी है क्योंकि क्लीन एनर्जी और एडवांस मैन्युफैक्चरिंग के लिए खास खनिजों की जरूरत होती है। इसके अलावा, निवेश के मोर्चे पर भी बड़ी खबरें आई हैं:
| प्लेटफॉर्म का नाम |
कुल निवेश |
निवेशक |
मकसद |
| North Star |
$300 मिलियन |
BII ($150M) और CIP ($150M) |
सोलर, विंड और स्टोरेज प्रोजेक्ट्स |
ब्रिटेन और भारत के बीच व्यापार भी बढ़ा है, जो 2025 में £48 बिलियन तक पहुंच गया। ‘UK-India Vision 2035’ के तहत अब हेल्थकेयर और फाइनेंशियल इंक्लूजन जैसे क्षेत्रों में भी साथ काम किया जाएगा।
Frequently Asked Questions (FAQs)
North Star प्लेटफॉर्म क्या है और इसमें कितना निवेश होगा?
North Star एक नया रिन्यूएबल एनर्जी प्लेटफॉर्म है जिसमें $300 मिलियन का निवेश होगा। इसमें British International Investment (BII) और Copenhagen Infrastructure Partners (CIP) ने $150-150 मिलियन दिए हैं, जो सोलर और विंड प्रोजेक्ट्स में इस्तेमाल होंगे।
Critical Minerals Global Supply Chain Observatory (GSCO) क्यों शुरू किया गया?
इसे क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी और नई टेक्नोलॉजी के लिए जरूरी खनिजों की सप्लाई चेन को मजबूत और सुरक्षित बनाने के लिए 4 जून 2026 को लॉन्च किया गया।