Finance: भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। ब्रिटेन के बिजनेस और ट्रेड सचिव Peter Kyle 2 जून 2026 को नई दिल्ली आएंगे। उनका मुख्य मकसद भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को
Finance: भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक बड़ा कदम उठाया जा रहा है। ब्रिटेन के बिजनेस और ट्रेड सचिव Peter Kyle 2 जून 2026 को नई दिल्ली आएंगे। उनका मुख्य मकसद भारत-यूके मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को जल्द से जल्द लागू करना है। इस दौरान वे भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री Piyush Goyal के साथ अहम बैठक करेंगे।
इस डील से आम जनता और बिजनेस को क्या फायदा होगा?
इस समझौते का सबसे बड़ा असर सामानों की कीमत और व्यापार की रफ्तार पर पड़ेगा। इस डील के जरिए ब्रिटेन के 99% और भारत के 90% टैरिफ (सीमा शुल्क) को कम करने की योजना है। इससे दोनों देशों के बीच सामान का आयात और निर्यात सस्ता, तेज और आसान हो जाएगा। ब्रिटेन सरकार का मानना है कि इससे उनके निर्यात पर लगने वाले टैक्स में सालाना 400 मिलियन पाउंड की कमी आएगी, जो 10 साल बाद 900 मिलियन पाउंड तक पहुंच सकती है।
व्यापारिक आंकड़ों पर एक नजर
विवरण
| जानकारी |
वर्तमान वार्षिक व्यापार
| £48 बिलियन |
ब्रिटेन जीडीपी में संभावित बढ़त
| 0.13% (£4.8 बिलियन) |
टैरिफ कटौती (UK)
| 99% |
टैरिफ कटौती (India)
| 90% |
लक्ष्य (2030 तक)
| व्यापार को दोगुना करना (USD 56 बिलियन से अधिक) |
डील लागू होने में देरी क्यों हो रही है?
तैयार होने के बावजूद इस समझौते को लागू करने में कुछ रुकावटें आई हैं। भारतीय वाणिज्य सचिव Rajesh Agrawal ने बताया कि ब्रिटेन द्वारा स्टील आयात पर लगाए गए नए प्रतिबंधों की वजह से देरी हो रही है। ये नए नियम 1 जुलाई 2026 से लागू होने वाले हैं। अब Peter Kyle की इस यात्रा का मकसद इन लंबित मुद्दों को सुलझाना और व्यापारिक रिश्तों को नई दिशा देना है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
India-UK FTA क्या है और इसका क्या फायदा है?
यह एक मुक्त व्यापार समझौता है जिसे CETA भी कहा जाता है। इसका मकसद दोनों देशों के बीच टैक्स (टैरिफ) कम करना है ताकि बिजनेस और ग्राहकों के लिए सामान खरीदना और बेचना सस्ता और आसान हो सके।
Peter Kyle की दिल्ली यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या है?
ब्रिटिश ट्रेड सचिव Peter Kyle का उद्देश्य मंत्री Piyush Goyal के साथ मिलकर उन मुद्दों को सुलझाना है जिनकी वजह से FTA लागू होने में देरी हो रही है, ताकि इसे जल्द से जल्द जमीन पर उतारा जा सके।