World : भारत और ब्रिटेन ने नई दिल्ली में ‘India-UK Critical Minerals Global Supply Chain Observatory (GSCO)’ की शुरुआत की है। इस पहल का मुख्य मकसद जरूरी खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना और उद्योगों के ल
World : भारत और ब्रिटेन ने नई दिल्ली में ‘India-UK Critical Minerals Global Supply Chain Observatory (GSCO)’ की शुरुआत की है। इस पहल का मुख्य मकसद जरूरी खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना और उद्योगों के लिए संसाधनों की कमी को दूर करना है। यह कदम दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए उठाया गया है।
यह Observatory क्यों शुरू की गई और इसका क्या फायदा होगा?
केंद्रीय कोयला और खान मंत्री G. Kishan Reddy ने बताया कि आधुनिक अर्थव्यवस्था, क्लीन एनर्जी और इलेक्ट्रिक गाड़ियों के लिए क्रिटिकल मिनरल्स बहुत जरूरी हैं। इस Observatory से भारत को सप्लाई चेन की सटीक जानकारी मिलेगी, जिससे सरकार बेहतर नीतियां बना पाएगी। यह नेशनल क्रिटिकल मिनरल मिशन (NCMM) के लक्ष्यों को पूरा करने में मदद करेगा। ब्रिटेन की विदेश सचिव Yvette Cooper ने कहा कि इससे दोनों देशों की आर्थिक ग्रोथ बढ़ेगी और संसाधनों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी।
इस प्रोजेक्ट में कौन-कौन से संस्थान और विभाग शामिल हैं?
इस बड़े प्रोजेक्ट में भारत और ब्रिटेन के कई सरकारी और शैक्षणिक संस्थान मिलकर काम कर रहे हैं। इसमें भारत की तरफ से IIT Bombay, IIT(ISM) Dhanbad और गुजरात का GMDC शामिल है। ब्रिटेन की तरफ से University of Cambridge का Institute for Manufacturing (IfM) और Centre for Process Innovation (CPI) अपनी विशेषज्ञता देंगे।
| संस्था/विभाग |
भूमिका/देश |
| Union Ministry of Coal and Mines |
भारत सरकार |
| Foreign, Commonwealth and Development Office |
ब्रिटेन सरकार |
| IIT Bombay & IIT(ISM) Dhanbad |
तकनीकी रिसर्च (भारत) |
| University of Cambridge (IfM) |
सप्लाई चेन इंटेलिजेंस (UK) |
| GMDC & iCEM |
खनन विकास (गुजरात/भारत) |
Frequently Asked Questions (FAQs)
India-UK Critical Minerals Observatory की शुरुआत कब और कहाँ हुई?
इसकी औपचारिक शुरुआत 4 जून 2026 को नई दिल्ली में की गई। इसकी घोषणा अक्टूबर 2025 में दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों की मुलाकात के दौरान हुई थी।
इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन में आने वाली कमियों को पहचानना, संसाधनों की सुरक्षा करना और खनिजों के निष्कर्षण, रिफाइनिंग और रीसाइक्लिंग की तकनीक को बढ़ावा देना है।