India: देश में प्रदूषण कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए अब कम कार्बन वाली इमारतों (Low Carbon Buildings) पर काम तेज होगा। Global Green Growth Institute (GGGI) ने इस प्रोजेक्ट के लिए India Smart Grid Forum (ISGF) को अप
India: देश में प्रदूषण कम करने और पर्यावरण को बचाने के लिए अब कम कार्बन वाली इमारतों (Low Carbon Buildings) पर काम तेज होगा। Global Green Growth Institute (GGGI) ने इस प्रोजेक्ट के लिए India Smart Grid Forum (ISGF) को अपना पार्टनर बनाया है। यह प्रोजेक्ट भारत समेत एशिया के पांच देशों में चल रहा है, जिसका मकसद 2028 तक कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।
इस प्रोजेक्ट से आम लोगों और शहरों को क्या फायदा होगा?
इस पहल का मुख्य उद्देश्य ऐसी बिल्डिंग्स बनाना है जो बिजली कम खर्च करें और पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाएँ। भारत में इसे आवास और शहरी मामलों के मंत्रालय (MoHUA) की देखरेख में लागू किया जा रहा है। इसके तहत पुरानी इमारतों में एयर कंडीशनिंग सिस्टम को बदला जाएगा ताकि वे कम बिजली लें। EESL के CEO विशाल कपूर ने बताया कि भारत की 60 इमारतों में कूलिंग सिस्टम को अपडेट किया जाएगा जिससे बिजली की बचत होगी।
किन राज्यों में हो रहा है काम और अब तक क्या हुआ?
भारत में यह प्रोजेक्ट मुख्य रूप से Uttar Pradesh, Haryana और Kerala में चलाया जा रहा है। अब तक की प्रगति इस प्रकार है:
| विवरण |
जानकारी |
| रजिस्ट्री की गई बिल्डिंग्स |
1,687 इमारतें |
| BEAT टूल से जांच |
302 इमारतें |
| ट्रेनिंग पाने वाले प्रोफेशनल |
2,400 से ज्यादा (18 राज्यों से) |
| महिला भागीदारी |
24 प्रतिशत |
| कूलिंग रेट्रोफिटिंग |
60 इमारतों की पहचान |
इसके अलावा, देश की चार यूनिवर्सिटीज ने भी अपने कोर्स में कम कार्बन वाली बिल्डिंग्स के कॉन्सेप्ट को शामिल करने में दिलचस्पी दिखाई है। यह प्रोजेक्ट जर्मनी सरकार के सहयोग से चलाया जा रहा है।
ISGF की क्या भूमिका रहेगी?
GGGI ने ISGF को आउटरीच पार्टनर बनाया है। अब ISGF का काम इस प्रोजेक्ट की जानकारी ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुँचाना और सरकारी व प्राइवेट सेक्टर के लोगों को इसके साथ जोड़ना होगा। इससे देश में ग्रीन बिल्डिंग्स के चलन को बढ़ावा मिलेगा और शहरों में कार्बन का स्तर कम करने में मदद मिलेगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ALCBT प्रोजेक्ट का मुख्य लक्ष्य क्या है?
इसका लक्ष्य 2028 तक भारत, कंबोडिया, इंडोनेशिया, थाईलैंड और वियतनाम में कम कार्बन वाली इमारतों के जरिए कार्बन उत्सर्जन को कम करना है।
भारत के किन राज्यों में इस प्रोजेक्ट का असर दिखेगा?
वर्तमान में यह प्रोजेक्ट मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, हरियाणा और केरल में लागू किया जा रहा है, जहाँ इमारतों की रजिस्ट्री और ऊर्जा दक्षता पर काम हो रहा है।