Delhi High Court में ‘Right to be Forgotten’ पर छिड़ी कानूनी जंग, India Kanoon ने फैसले को दी चुनौती
Delhi: इंटरनेट पर अपनी निजी जानकारी हटवाने के अधिकार यानी ‘राइट टू बी फॉरगॉटन’ (Right to be Forgotten) को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में बड़ी कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। कानूनी डेटाबेस चलाने वाली वेबसाइट India Kan
Delhi: इंटरनेट पर अपनी निजी जानकारी हटवाने के अधिकार यानी ‘राइट टू बी फॉरगॉटन’ (Right to be Forgotten) को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में बड़ी कानूनी लड़ाई शुरू हो गई है। कानूनी डेटाबेस चलाने वाली वेबसाइट India Kanoon ने कोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी है, जिसमें लोगों को सर्च इंजन और कानूनी वेबसाइटों से अपनी निजी जानकारी हटवाने की अनुमति दी गई थी।
मामला तब शुरू हुआ जब जस्टिस सचिन दत्ता की सिंगल बेंच ने 29 मई 2026 को एक फैसला सुनाया। कोर्ट ने माना कि निजता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है। इस फैसले के बाद Google और India Kanoon जैसे प्लेटफॉर्म्स को निर्देश दिया गया था कि वे उन मामलों में नाम से सर्च करने की सुविधा बंद करें, जिनमें व्यक्ति बरी हो चुका हो या मामला निजी प्रकृति का हो। कोर्ट का कहना था कि डिजिटल रिकॉर्ड हमेशा रहने से व्यक्ति की छवि गलत तरीके से पेश होती है।
अब India Kanoon ने इस आदेश के खिलाफ 14 जुलाई 2026 को अपील दाखिल की है। कंपनी का कहना है कि यह फैसला ‘ओपन जस्टिस’ यानी खुली न्याय प्रणाली के खिलाफ है। उनका तर्क है कि जब कोई जानकारी कोर्ट के पब्लिक रिकॉर्ड का हिस्सा बन जाती है, तो उसे हटाया नहीं जाना चाहिए। कंपनी ने यह भी कहा कि ‘प्रासंगिक नहीं’ या ‘सार्वजनिक उद्देश्य नहीं’ जैसे शब्दों के आधार पर जानकारी हटाना मनमाना सेंसरशिप जैसा होगा।
इस अपील की सुनवाई चीफ जस्टिस डी.के. उपाध्याय और जस्टिस तेजस करिया की डिवीजन बेंच कर रही है। 14 जुलाई को जब यह मामला कोर्ट पहुंचा, तब जिला अदालतों के क्षेत्राधिकार को लेकर वकीलों की हड़ताल थी, जिसकी वजह से सुनवाई टल गई। अब इस मामले की अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 को होगी।
बता दें कि यह पूरा विवाद उन 38 याचिकाओं से जुड़ा है, जिनमें बरी हुए लोगों और वैवाहिक विवादों में फंसे पक्षों ने अपनी पहचान इंटरनेट सर्च से हटाने की मांग की थी। भारत के सुप्रीम कोर्ट ने पुट्टास्वामी मामले में निजता के अधिकार को तो माना था, लेकिन ‘राइट टू बी फॉरगॉटन’ को लेकर अभी कोई स्पष्ट और पूर्ण नियम तय नहीं किए हैं।