India और Japan के बीच AI और आर्थिक सुरक्षा पर बड़ा समझौता, PM Modi से मिलीं जापानी PM Sanae Takaichi
Delhi: जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली पहुंचीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर वह 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आई हैं। यह दौरा 3 जुलाई तक चलेगा, जिसमें दो
Delhi: जापान की प्रधानमंत्री Sanae Takaichi 1 जुलाई 2026 को नई दिल्ली पहुंचीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर वह 16वें भारत-जापान वार्षिक शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने आई हैं। यह दौरा 3 जुलाई तक चलेगा, जिसमें दोनों देशों के बीच व्यापार, तकनीक और सुरक्षा को लेकर कई अहम फैसले लिए जाएंगे।
प्रधानमंत्री मोदी ने PM Takaichi का स्वागत किया और दोनों देशों के रिश्तों को और मजबूत करने की बात कही। हैदराबाद हाउस में हुई रणनीतिक बातचीत के दौरान आर्थिक सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा पर खास चर्चा हुई। इस दौरे में जापान की तरफ से सुजुकी मोटर्स और टोयोटा जैसी बड़ी कंपनियों के 50 से ज्यादा बिजनेस लीडर्स भी भारत आए हैं। दोनों देश एक साझा घोषणा पत्र जारी करेंगे, जिसमें आर्थिक दबाव डालने वाले देशों के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया जाएगा।
इस मुलाकात में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) को लेकर एक नया रोडमैप तैयार किया गया है। इसके तहत मैन्युफैक्चरिंग, हेल्थकेयर और मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों के लिए AI समाधान विकसित किए जाएंगे। साथ ही, साइबर सुरक्षा और डेटा सेंटर जैसे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर भी सहमति बनी है।
| मुख्य समझौते और घोषणाएं | विवरण |
|---|---|
| निवेश | जापानी कंपनियां लगभग 2 ट्रिलियन येन (करीब 12.5 बिलियन डॉलर) के प्रोजेक्ट्स ला सकती हैं |
| ट्रेड सेटलमेंट | अब व्यापार के लिए डॉलर की जगह सीधे येन-रुपये में लेन-देन का रास्ता खुलेगा |
| IT प्रोफेशनल्स | 2030 तक 500 कुशल भारतीय IT प्रोफेशनल्स को जापान जाने की सुविधा मिलेगी |
| AI सहयोग | जापान-भारत AI सहयोग पहल के तहत जॉइंट रिसर्च और गवर्नेंस पर काम होगा |
| अन्य समझौते | क्रिटिकल मिनरल्स, बैटरी, क्लीन एनर्जी और बायो गैस पर करीब 10 समझौतों पर मुहर लगेगी |
| रक्षा संबंध | समुद्री सुरक्षा और डिफेंस टेक्नोलॉजी में सहयोग बढ़ेगा, 2+2 मीटिंग की योजना है |
जापान अब चीन के विकल्प के रूप में भारत को एक मुख्य केंद्र मान रहा है। इस वजह से सेमीकंडक्टर और बैटरी जैसे जरूरी सामानों की सप्लाई चेन को सुरक्षित करने पर जोर दिया जा रहा है। यह दौरा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।