India और Japan अब AI और चिप मैन्युफैक्चरिंग पर करेंगे काम, ₹1 लाख करोड़ के निवेश की तैयारी
Finance: दिल्ली मेट्रो की कामयाबी के बाद अब भारत और जापान मिलकर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर चिप बनाने पर जोर देंगे। दोनों देशों ने तकनीक के क्षेत्र में हाथ मिलाया है ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा
Finance: दिल्ली मेट्रो की कामयाबी के बाद अब भारत और जापान मिलकर आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर चिप बनाने पर जोर देंगे। दोनों देशों ने तकनीक के क्षेत्र में हाथ मिलाया है ताकि भविष्य की जरूरतों को पूरा किया जा सके और बाहरी देशों पर निर्भरता कम की जा सके। इस साझेदारी से भारत में नई फैक्ट्रियां लगेंगी और युवाओं को रोजगार के बेहतर मौके मिलेंगे।
2 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जापानी प्रधानमंत्री सानाए ताकाइची के बीच एक शिखर सम्मेलन हुआ। इस बैठक में आर्थिक सुरक्षा और तकनीक पर विस्तार से चर्चा की गई। जापान ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग, AI, ग्रीन एनर्जी और फाइनेंस जैसे सेक्टर में करीब ₹1 लाख करोड़ (2 ट्रिलियन येन) निवेश करने का वादा किया है। यह निवेश पिछले साल तय किए गए 10 साल में 10 ट्रिलियन येन के लक्ष्य का हिस्सा है।
इस समझौते के तहत कई बड़ी जापानी कंपनियां भारत में अपना काम बढ़ाएंगी। चिप बनाने के लिए Fujifilm, Toshiba, Tokyo Electron और Tata Electronics जैसी कंपनियां शामिल हैं। इसके अलावा Suzuki और Toyota जैसी कंपनियां भी रिसर्च और मैन्युफैक्चरिंग में निवेश कर रही हैं। जापान की JICA संस्था भारत के ‘IndiaAI Mission’ के तहत ‘AI Kosh’ नाम का एक डेटा प्लेटफॉर्म तैयार करने में मदद कर रही है।
| क्षेत्र | मुख्य विवरण |
|---|---|
| निवेश राशि | करीब ₹1 लाख करोड़ (2 ट्रिलियन येन) |
| मुख्य फोकस | AI, सेमीकंडक्टर चिप और ग्रीन एनर्जी |
| महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट | Fujifilm की सेमीकंडक्टर मटेरियल फैक्ट्री |
| तकनीकी सहयोग | AI Kosh डेटा प्लेटफॉर्म का विकास |
| मानव संसाधन | हजारों कुशल भारतीय टेक प्रोफेशनल्स जापान जाएंगे |
| MoUs | अगस्त 2025 से अब तक 120 समझौते साइन हुए |
भारत और जापान का यह कदम खास तौर पर चीन पर निर्भरता कम करने के लिए उठाया गया है। अब भारत में ऐसी फैक्ट्रियां लगेंगी जो रोजाना लाखों कंप्यूटर चिप्स बना सकेंगी। साथ ही, ऐसी AI प्रणालियों पर काम होगा जो भारत की अलग-अलग क्षेत्रीय भाषाओं में काम कर सकेंगी। IIT गुवाहाटी और IIT हैदराबाद जैसे संस्थान भी चिप मैन्युफैक्चरिंग और रिसर्च में अपनी भूमिका निभाएंगे।