Delhi में भारत-जर्मनी क्लाइमेट टॉक, क्लीन एनर्जी में महिलाओं की भागीदारी पर हुई चर्चा

Delhi: नई दिल्ली में जर्मन दूतावास की मेजबानी में भारत-जर्मनी क्लाइमेट टॉक का आयोजन किया गया। इस बैठक में भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन यानी स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने में महिलाओं की भूमिका पर खास चर्चा हुई। इसमें इस बात

Delhi: नई दिल्ली में जर्मन दूतावास की मेजबानी में भारत-जर्मनी क्लाइमेट टॉक का आयोजन किया गया। इस बैठक में भारत के क्लीन एनर्जी ट्रांजिशन यानी स्वच्छ ऊर्जा की ओर बढ़ने में महिलाओं की भूमिका पर खास चर्चा हुई। इसमें इस बात पर जोर दिया गया कि महिलाओं को केवल लाभार्थी नहीं, बल्कि इनोवेटर्स, एंटरप्रेन्योर्स और फैसला लेने वालों के रूप में देखा जाना चाहिए।

जर्मन राजदूत Philipp Ackermann ने कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए कहा कि जलवायु कार्रवाई में सबको साथ लेकर चलना और ऊर्जा बदलाव में महिलाओं की भागीदारी केवल समानता के लिए नहीं, बल्कि भारत के लिए एक बड़ा आर्थिक अवसर भी है। उन्होंने बताया कि अगर महिलाओं को संसाधनों और नेतृत्व का समान मौका मिले, तो इससे नए बाजार खुलेंगे, रोजगार बढ़ेंगे और नई खोजें होंगी। राजदूत ने यह भी कहा कि महिलाओं के बिना ऊर्जा परिवर्तन सफल नहीं हो सकता। साथ ही उन्होंने मिडिल ईस्ट के मौजूदा हालातों को देखते हुए ऊर्जा सुरक्षा के लिए ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाने की जरूरत बताई।

इस मौके पर ‘Powering the Future: Women at the Heart of India’s Energy Transition’ नाम की एक किताब भी लॉन्च की गई। इस किताब को नेहा सैगल ने लिखा है और इसे Heinrich Böll Stiftung, New Delhi ने पब्लिश किया है। इस किताब में ओडिशा, पंजाब, झारखंड, महाराष्ट्र और तमिलनाडु की उन महिलाओं की कहानियाँ बताई गई हैं, जो भारत के ऊर्जा भविष्य को बदल रही हैं। इसमें मांग की गई है कि जलवायु और ऊर्जा नीति में जेंडर को एक मुख्य आधार बनाया जाए।

भारत और जर्मनी दोनों देश मिलकर एक समावेशी भविष्य बनाने के लिए काम कर रहे हैं। इसके लिए Indo-German Partnership for Green and Sustainable Development और Indo-German Energy Forum जैसे प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि पर्यावरण को बेहतर बनाया जा सके और महिलाओं को इस बदलाव का हिस्सा बनाया जा सके।