Himalayas में भूस्खलन का खतरा होगा कम, IIT Mandi ने बनाया Landslide Early Warning System
Himachal Pradesh: पहाड़ों में बारिश के दौरान भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड एक बड़ी समस्या बन जाती है जिससे जान-माल का भारी नुकसान होता है। इस खतरे को कम करने के लिए IIT Mandi के रिसर्चर्स ने एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है जो पूरे
Himachal Pradesh: पहाड़ों में बारिश के दौरान भूस्खलन यानी लैंडस्लाइड एक बड़ी समस्या बन जाती है जिससे जान-माल का भारी नुकसान होता है। इस खतरे को कम करने के लिए IIT Mandi के रिसर्चर्स ने एक ऐसा सिस्टम तैयार किया है जो पूरे भारतीय हिमालयी क्षेत्र के लिए काम करेगा। यह सिस्टम मानसून के दौरान हर दिन भूस्खलन के जोखिम का पूर्वानुमान बताएगा जिससे समय रहते लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया जा सकेगा।
इस सिस्टम को Landslide Early Warning System (LEWS) नाम दिया गया है। यह एक वेब-आधारित एप्लिकेशन है जिसके जरिए अधिकारी और आम लोग जान पाएंगे कि कौन से इलाके ज्यादा खतरे में हैं। इसके लिए Google Earth Engine (GEE) का इस्तेमाल कर एक पोर्टल बनाया गया है। लोग इस पोर्टल पर आज और पिछले तीन दिनों का पूर्वानुमान देख सकते हैं, PDF बुलेटिन डाउनलोड कर सकते हैं और व्हाट्सएप के जरिए अपने इलाके की चेतावनी पा सकते हैं।
प्रोफेसर डेरिक्स प्रेज शुक्ला के नेतृत्व में तैयार यह सिस्टम जमीन की बनावट और बारिश के असली समय के डेटा को मिलाकर काम करता है। यह सिस्टम भारत के अन्य सिस्टम्स के मुकाबले ज्यादा बड़ा है क्योंकि यह पूरे हिमालयी क्षेत्र को कवर करता है। इससे आपदा प्रबंधन एजेंसियों और NDRF जैसी टीमों को समय पर तैयारी करने में मदद मिलेगी।
इस तकनीक को बेहतर बनाने के लिए Geological Survey of India (GSI) के करीब 26,000 पुराने भूस्खलन डेटा का इस्तेमाल किया गया है। इससे पहले इस सिस्टम का एक वर्जन मंडी जिले के तीन इलाकों में लगाया गया था, जिसने 90% से ज्यादा सटीकता के साथ काम किया और एक मिलीमीटर से भी कम की हलचल को पकड़ लिया था। दिसंबर 2025 तक हिमाचल प्रदेश के 60 से ज्यादा हाई-रिस्क इलाकों में AI आधारित सिस्टम लगाया जा चुका है, जो भूस्खलन से तीन घंटे पहले चेतावनी देने में सक्षम है।