Delhi: राजधानी दिल्ली के IIT Delhi और Cadence ने मिलकर एक नया AI-इनेबल्ड इनोवेशन लैब शुरू किया है। इस लैब का मकसद भारत के युवाओं को सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग में माहिर बनाना है। यहाँ छात्रों को वही आधुनिक टूल्स और सॉफ्टवेयर
Delhi: राजधानी दिल्ली के IIT Delhi और Cadence ने मिलकर एक नया AI-इनेबल्ड इनोवेशन लैब शुरू किया है। इस लैब का मकसद भारत के युवाओं को सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग में माहिर बनाना है। यहाँ छात्रों को वही आधुनिक टूल्स और सॉफ्टवेयर मिलेंगे जो बड़ी कंपनियां इस्तेमाल करती हैं, ताकि उन्हें पढ़ाई के साथ-साथ इंडस्ट्री का असली अनुभव मिल सके।
इस लैब से छात्रों और स्टार्टअप्स को क्या फायदा होगा?
इस सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में छात्रों को 200 से ज्यादा AI-इनेबल्ड इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स मिलेंगे। ये टूल्स चिप डिजाइन, वेरिफिकेशन और सिस्टम एनालिसिस जैसे कामों में मदद करेंगे। साथ ही, यहाँ एक इनक्यूबेटर प्रोग्राम भी होगा, जिससे नए स्टार्टअप्स को कम कीमत पर डेवलपमेंट टूल्स मिलेंगे ताकि वे अपने आइडिया को प्रोटोटाइप और असली चिप में बदल सकें।
कोर्स और रिसर्च में क्या बदलाव आएंगे?
IIT Delhi ने अब अपने सिलेबस में Cadence के कोर्सवेयर को शामिल कर लिया है। अब छात्र सिर्फ किताबों से नहीं, बल्कि प्रोजेक्ट्स और असल दुनिया की समस्याओं को सुलझाकर सीखेंगे। इसके अलावा, IITs और NITs के चौथे साल के चुनिंदा छात्रों के लिए ‘अर्ली मास्टर्स रिसर्च’ का रास्ता भी खोला गया है, जहाँ उन्हें IIT Delhi के प्रोफेसर और Cadence के एक्सपर्ट्स मिलकर गाइड करेंगे।
भारत के सेमीकंडक्टर मिशन में कैसे होगी मदद?
यह पहल भारत सरकार के सेमीकंडक्टर मिशन और डिजाइन-लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) स्कीम के तहत शुरू की गई है। Cadence के इंडिया मैनेजिंग डायरेक्टर आलोक जैन ने बताया कि इससे क्लासरूम और इंडस्ट्री के बीच का अंतर खत्म होगा। वहीं, प्रोफेसर जयदेव ने कहा कि इस सहयोग से रिसर्च का स्तर बढ़ेगा और छात्रों को हाई-इम्पैक्ट करियर बनाने में मदद मिलेगी।
Frequently Asked Questions (FAQs)
IIT Delhi-Cadence इनोवेशन लैब का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर डिजाइन की क्षमता बढ़ाना और छात्रों को इंडस्ट्री-ग्रेड AI टूल्स उपलब्ध कराना है, ताकि वे चिप डिजाइनिंग में एक्सपर्ट बन सकें।
क्या यह लैब स्टार्टअप्स की मदद करेगा?
हाँ, लैब के अंदर एक इनक्यूबेटर प्रोग्राम चलाया जाएगा जो प्री-सीड स्टार्टअप्स को कम लागत पर डेवलपमेंट टूल्स देगा ताकि वे अपना पहला सिलिकॉन प्रोटोटाइप तैयार कर सकें।