IIT Delhi ने बनाई खास एरोजेल जैकेट, सियाचिन की हाड़ कंपाने वाली ठंड में जवानों को रखेगी गर्म
Delhi: देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए IIT Delhi के शोधकर्ताओं ने एक कमाल का आविष्कार किया है। सियाचिन जैसे इलाकों में जहां तापमान माइनस 40 डिग्री तक गिर जाता है, वहां जवानों को भारी-भरकम कपड़े पहनने पड़ते हैं जिससे
Delhi: देश की सीमाओं पर तैनात जवानों के लिए IIT Delhi के शोधकर्ताओं ने एक कमाल का आविष्कार किया है। सियाचिन जैसे इलाकों में जहां तापमान माइनस 40 डिग्री तक गिर जाता है, वहां जवानों को भारी-भरकम कपड़े पहनने पड़ते हैं जिससे उनका वजन बढ़ जाता है और चलने-फिरने में दिक्कत होती है। अब इस समस्या को दूर करने के लिए एक अल्ट्रा-लाइटवेट बायोपॉलिमर एरोजेल जैकेट तैयार की गई है जो वजन में हल्की है लेकिन गर्मी देने में बेहद असरदार है।
IIT Delhi के वस्त्र और फाइबर इंजीनियरिंग विभाग के शोधकर्ताओं ने इस तकनीक पर काम किया है। यह जैकेट न केवल जवानों को गर्म रखेगी, बल्कि उनके शरीर की मूवमेंट को भी आसान बनाएगी। इसके साथ ही शोधकर्ताओं ने एक एरोजेल-आधारित स्लीपिंग बैग और गद्दे की प्रणाली भी विकसित की है। यह पूरा सिस्टम -60 डिग्री सेल्सियस तक की भीषण ठंड में भी थर्मल सुरक्षा देने में सक्षम है। खास बात यह है कि यह सिस्टम सांस लेने योग्य (breathable), जलरोधक और धोने योग्य भी है।
इस नवाचार को कपड़ा मंत्रालय, भारत सरकार के राष्ट्रीय तकनीकी वस्त्र मिशन (NTTM) के तहत आयोजित ‘सैनरचना 2026’ हैकथॉन में टॉप तीन अवधारणाओं में जगह मिली। केंद्रीय कपड़ा मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने इस उपलब्धि के लिए आविष्कारकों को सम्मानित किया। इस प्रोजेक्ट का मार्गदर्शन प्रोफेसर हरुन वेंकटेशन ने किया, जबकि श्री सुदीप्तो बेहरा और श्रीमती सुकृति बलियान जैसे पीएचडी शोधकर्ताओं ने इस स्लीपिंग बैग प्रणाली को पेश किया।
तकनीकी तौर पर इस जैकेट और गद्दों में प्राकृतिक संसाधनों से बने बायोडिग्रेडेबल पॉलिमर का इस्तेमाल किया गया है। वयोमा एरोजेल लैब के सुजान सतीश कौशिक को भी इस क्षेत्र में उनके काम के लिए 2025 एशियाई पॉलिमर एसोसिएशन (APA) अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में सर्वश्रेष्ठ पोस्टर पुरस्कार मिला। यह पूरी कोशिश आत्मनिर्भर भारत के विजन को आगे बढ़ाने और भारतीय सैनिकों को दुनिया की सबसे आधुनिक और हल्की सुरक्षात्मक पोशाक देने की दिशा में एक बड़ा कदम है।