Bihar: पटना के IGIMS अस्पताल में डॉक्टरों ने महाधमनी (Aorta) के इलाज के लिए पहली बार TEVAR तकनीक का इस्तेमाल किया है। इस आधुनिक तरीके से अब मरीजों का इलाज बिना किसी बड़ी चीर-फाड़ के संभव हो सकेगा। इस सुविधा से बिहार और झ
Bihar: पटना के IGIMS अस्पताल में डॉक्टरों ने महाधमनी (Aorta) के इलाज के लिए पहली बार TEVAR तकनीक का इस्तेमाल किया है। इस आधुनिक तरीके से अब मरीजों का इलाज बिना किसी बड़ी चीर-फाड़ के संभव हो सकेगा। इस सुविधा से बिहार और झारखंड के उन मरीजों को बड़ी राहत मिलेगी जिन्हें पहले इस इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाना पड़ता था।
TEVAR तकनीक क्या है और यह कैसे काम करती है
TEVAR का मतलब Thoracic Endovascular Aortic Repair है। यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें छाती को बिना खोले महाधमनी की मरम्मत की जाती है। इसमें जांघ के पास एक छोटा चीरा लगाकर एक कैथेटर के जरिए स्टेंट ग्राफ्ट (धातु की जाली वाला ट्यूब) को महाधमनी के कमजोर हिस्से में फिट किया जाता है। यह स्टेंट धमनी की दीवार को मजबूती देता है जिससे उसके फटने का खतरा खत्म हो जाता है।
इस इलाज के क्या फायदे हैं
पारंपरिक ओपन सर्जरी के मुकाबले TEVAR तकनीक में मरीज को कम दर्द होता है और रिकवरी बहुत तेजी से होती है। जहाँ पुरानी सर्जरी में अस्पताल में एक-दो हफ्ते रुकना पड़ता था, वहीं इस तकनीक से मरीज 2 से 3 दिन में घर जा सकते हैं। यह तरीका बुजुर्गों और गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों के लिए ज्यादा सुरक्षित माना जाता है क्योंकि इसमें खून बहने और इन्फेक्शन का खतरा कम होता है।
किन बीमारियों में होता है यह इलाज
इस तकनीक का इस्तेमाल मुख्य रूप से थोरैसिक एओर्टिक एन्यूरिज्म (धमनी का फूलना) और एओर्टिक डिसेक्शन (धमनी की अंदरूनी परत का फटना) जैसी गंभीर स्थितियों में किया जाता है। इसके अलावा चोट के कारण महाधमनी में आई क्षति को ठीक करने के लिए भी इसका उपयोग होता है। IGIMS पहले भी Awake CABG और अन्य जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक कर चुका है, जिससे संस्थान की क्षमता बढ़ी है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
TEVAR सर्जरी और सामान्य सर्जरी में क्या अंतर है
सामान्य सर्जरी में छाती को काटकर महाधमनी का इलाज किया जाता है जिसमें समय और जोखिम ज्यादा होता है। TEVAR में बिना बड़ी चीर-फाड़ के, केवल एक छोटे छेद के जरिए स्टेंट डालकर इलाज किया जाता है जिससे मरीज जल्दी ठीक होता है।
क्या यह इलाज बिहार और झारखंड के मरीजों के लिए उपलब्ध है
हाँ, पटना के IGIMS में इस तकनीक के सफल इस्तेमाल के बाद अब बिहार और झारखंड के मरीजों को अपने क्षेत्र में ही यह आधुनिक इलाज मिल सकेगा, जिससे उनका समय और पैसा दोनों बचेगा।