Delhi: भारतीय वायु सेना (IAF) ने नई दिल्ली में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता की याद में 88 घंटे की एक विशेष दौड़ आयोजित की। यह इवेंट 7 मई से 10 मई 2026 तक चला, जिसमें वायु सेना और भारतीय सेना के जवानों ने हिस्सा ल
Delhi: भारतीय वायु सेना (IAF) ने नई दिल्ली में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता की याद में 88 घंटे की एक विशेष दौड़ आयोजित की। यह इवेंट 7 मई से 10 मई 2026 तक चला, जिसमें वायु सेना और भारतीय सेना के जवानों ने हिस्सा लिया। इस आयोजन का मकसद सेना के बीच आपसी तालमेल बढ़ाना और आम जनता को भारतीय रक्षा बलों की ताकत से रूबरू कराना था।
इस दौड़ की शुरुआत और समापन कैसे हुआ?
इस यादगार दौड़ की शुरुआत 7 मई 2026 को रात 01:05 बजे इंडिया गेट से हुई। एयर ऑफिसर इन चार्ज एडमिनिस्ट्रेशन (AOA) ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह एक रिले दौड़ थी जो लगातार 88 घंटों तक चली। अंत में 10 मई 2026 को शाम 17:00 बजे एयर फोर्स स्टेशन नई दिल्ली में वायु सेना प्रमुख (CAS) ने इसे समाप्त किया। इस दौरान वायु सेना के जैज़ बैंड ने नेहरू पार्क में लाइव परफॉर्मेंस भी दी।
Operation Sindoor क्या था और क्यों मनाया गया?
ऑपरेशन सिंदूर भारत का एक बड़ा सैन्य हमला था, जो 7 मई 2025 को शुरू हुआ था। यह हमला अप्रैल 2025 में पहलगाम, जम्मू और कश्मीर में हुए आतंकी हमले का जवाब था, जिसमें 26 नागरिक मारे गए थे। इस ऑपरेशन में भारतीय सेना, वायु सेना और नौसेना ने मिलकर पाकिस्तान और PoJK में नौ आतंकी कैंपों को तबाह किया था। वायु सेना ने इस दौरान 13 पाकिस्तानी विमानों को नष्ट किया और 11 हवाई अड्डों को निशाना बनाया।
बड़े नेताओं ने इस मिशन के बारे में क्या कहा?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस ऑपरेशन को राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता बताया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि यह मिशन आतंकवाद के खिलाफ भारत के कड़े इरादों को दिखाता है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने इसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ की सफलता और सेनाओं के बीच बेहतर तालमेल का प्रतीक बताया। वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने बताया कि इस ऑपरेशन में पांच पाकिस्तानी लड़ाकू विमान और एक निगरानी विमान को मार गिराया गया था।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ऑपरेशन सिंदूर क्यों चलाया गया था?
यह ऑपरेशन 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए चलाया गया था, जिसमें 26 आम नागरिकों की जान गई थी।
88 घंटे की दौड़ में कौन-कौन शामिल हुआ?
इस दौड़ में भारतीय वायु सेना और भारतीय सेना के सभी कमांड्स से करीब 600 रनर्स ने हिस्सा लिया, साथ ही कई नागरिक वॉलेंटियर्स भी जुड़े।