Haryana: गुरुग्राम के लोगों को हर साल मानसून में सड़कों पर भरे पानी से जूझना पड़ता है। इस समस्या को खत्म करने के लिए Gurugram Metropolitan Development Authority (GMDA) ने एक नया प्लान तैयार किया है। अब शहर की ग्रीन बेल्ट
Haryana: गुरुग्राम के लोगों को हर साल मानसून में सड़कों पर भरे पानी से जूझना पड़ता है। इस समस्या को खत्म करने के लिए Gurugram Metropolitan Development Authority (GMDA) ने एक नया प्लान तैयार किया है। अब शहर की ग्रीन बेल्ट्स को ‘ग्रीन ड्रेन’ में बदला जाएगा ताकि बारिश का पानी सड़कों पर जमा होने के बजाय जमीन के अंदर जाए और नालों तक आसानी से पहुँच सके।
ग्रीन बेल्ट को ग्रीन ड्रेन में कैसे बदला जाएगा?
GMDA के कार्यकारी इंजीनियर अमित गोदारा ने बताया कि इसके लिए ग्रीन बेल्ट की ऊंचाई कम की जा रही है। इससे ये इलाके ‘बायोस्वेल्स’ यानी प्राकृतिक चैनलों की तरह काम करेंगे जो बारिश के पानी को सोख लेंगे। इस तरीके से न केवल सड़कों पर जलभराव कम होगा, बल्कि जमीन के नीचे पानी का लेवल (groundwater recharge) भी बढ़ेगा।
मानसून से पहले कौन-कौन से काम पूरे होंगे?
GMDA CEO पी.सी. मीणा ने साफ किया है कि मानसून से पहले सभी जरूरी काम पूरे करना अनिवार्य है। इसके लिए प्रशासन ने कई कदम उठाए हैं:
- मास्टर सेक्टर रोड के किनारे 45 किलोमीटर नालों की सफाई हो चुकी है, बाकी 75 किलोमीटर का काम जल्द पूरा होगा।
- Narsingpur में NH-8 के नीचे 2.8 करोड़ रुपये की लागत से एक नया पाइपेड कल्वर्ट बनाया जाएगा ताकि पानी Badshapur ड्रेन में जा सके।
- सेक्टर 25 को मास्टर ड्रेन से जोड़ने के लिए 2.1 किलोमीटर लंबी नई ड्रेनेज लाइन बिछाई जाएगी, जिस पर 3.6 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
- पुराने दिल्ली-गुड़गांव रोड पर महावीर चौक से कापशेरा बॉर्डर तक 8.3 करोड़ रुपये की लागत से ड्रेनेज नेटवर्क सुधारा जाएगा।
प्रशासन की रणनीति और चुनौतियां
GMDA अब एक ऐसी व्यवस्था बना रहा है जहाँ पानी को ग्रीन बेल्ट में मोड़ा जाए, नए तालाब बनाए जाएं और बाकी पानी को सरफेस ड्रेन के जरिए बाहर निकाला जाए। पहले अलग-अलग एजेंसियों ने टुकड़ों में नाले बनाए थे जिससे नेटवर्क टूट गया था, जिसे अब फिर से जोड़ा जा रहा है। NHAI के साथ मिलकर NH-48 पर भी कल्वर्ट का काम तेज किया जा रहा है।
Frequently Asked Questions (FAQs)
ग्रीन ड्रेन (Green Drain) क्या है और यह कैसे काम करेगा?
यह एक ऐसी तकनीक है जिसमें ग्रीन बेल्ट की ऊंचाई कम करके उन्हें बायोस्वेल्स बनाया जाता है। यह बारिश के पानी को सोखकर जमीन के अंदर भेजता है और अतिरिक्त पानी को नालों तक पहुँचाता है, जिससे सड़कों पर पानी जमा नहीं होता।
गुरुग्राम के किन इलाकों में जलभराव कम करने के लिए काम चल रहा है?
मुख्य रूप से DLF Phase-2, सेक्टर 25, Narsingpur, और पुराने दिल्ली-गुड़गांव रोड (महावीर चौक से कापशेरा बॉर्डर) जैसे इलाकों में ड्रेनेज सिस्टम को सुधारा जा रहा है।