Gurgaon में जलभराव रोकने के लिए 105 करोड़ का नया ड्रेन शुरू, क्या इस बार नहीं डूबेगी शहर की सड़कें

Haryana/Gurgaon: गुड़गांव में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव से निपटने के लिए प्रशासन ने 105 करोड़ रुपये की लागत से एक नया स्टॉर्मवाटर ड्रेन तैयार किया है। यह 4.3 किलोमीटर लंबा Leg-4 ड्रेन अब चालू हो गया है, जिससे शहर

Haryana/Gurgaon: गुड़गांव में मानसून के दौरान होने वाले जलभराव से निपटने के लिए प्रशासन ने 105 करोड़ रुपये की लागत से एक नया स्टॉर्मवाटर ड्रेन तैयार किया है। यह 4.3 किलोमीटर लंबा Leg-4 ड्रेन अब चालू हो गया है, जिससे शहर के कई इलाकों में बारिश के पानी की निकासी बेहतर होने की उम्मीद है।

यह नया ड्रेन वटिका चौक से सेक्टर 37D तक बनाया गया है। इसे RCC बॉक्स ड्रेन के तौर पर तैयार किया गया है जिसकी क्षमता 1,400 क्यूसेक है। यह मुख्य रूप से Southern Peripheral Road (SPR) के पास बसे घनी आबादी वाले और कमर्शियल इलाकों के पानी को निकालने का काम करेगा। GMDA अधिकारियों का कहना है कि इस प्रोजेक्ट का मकसद बादशाहपुर ड्रेन पर दबाव कम करना है, क्योंकि इसी वजह से दक्षिण गुड़गांव में सबसे ज्यादा बाढ़ जैसी स्थिति बनती थी।

प्रशासन ने दावा किया है कि पिछले कुछ सालों के प्रोजेक्ट्स की वजह से शहर में जलभराव वाले पॉइंट्स 2019 के 90 से घटकर 2024 तक 30 रह गए हैं। इस नए ड्रेन से यह संख्या और कम होगी। हाल ही में 5 जुलाई को हुई बारिश के बाद सुभाष चौक, हीरो होंडा चौक, उमंग भारद्वाज रोड और शीतला माता रोड जैसे मुख्य रास्तों पर कोई बड़ा जलभराव नहीं देखा गया, जिसका श्रेय इन नए इंतजामों को दिया जा रहा है। हालांकि, पुराने गुड़गांव के इलाकों में अभी भी पानी भरा रहा और बिजली कटौती की समस्या आई।

तैयारियों को पुख्ता करने के लिए Municipal Corporation of Gurugram (MCG) ने 2 जुलाई से एक 24×7 मानसून मैनेजमेंट कॉल सेंटर भी शुरू किया है। यह सेंटर CCTV कैमरों के जरिए पानी जमा होने वाली जगहों की निगरानी कर रहा है और तुरंत मशीनों को वहां भेज रहा है। साथ ही GMDA और NHAI ने राजीव चौक, सुभाष चौक और AIT चौक जैसे हॉटस्पॉट्स पर सफाई और ड्रेनेज का काम तेज कर दिया है।

इतने बड़े निवेश के बावजूद अधिकारियों ने यह साफ किया है कि अगर कुछ ही घंटों में 100 मिमी से ज्यादा बारिश होती है, तो केवल ड्रेन काफी नहीं होंगे। ऐसी स्थिति में सड़कों से पानी निकालने के लिए पंप और सक्शन पाइप का इस्तेमाल करना पड़ेगा। इसके अलावा HSVP की पुरानी प्लॉटेड कॉलोनियों में इस मानसून भी जलभराव का खतरा बना रह सकता है।