Delhi High Court में Google की दलील, कहा- YouTube पर कोर्ट की सुनवाई के वीडियो रोकना हमारे बस में नहीं

Delhi: Google ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि वह YouTube पर कोर्ट की सुनवाई के उन वीडियो को खुद से रोकने या उनकी निगरानी करने में सक्षम नहीं है जिन्हें बिना अनुमति के अपलोड किया जाता है। कंपनी ने अदालत से इस मामले से

Delhi: Google ने दिल्ली हाई कोर्ट को बताया है कि वह YouTube पर कोर्ट की सुनवाई के उन वीडियो को खुद से रोकने या उनकी निगरानी करने में सक्षम नहीं है जिन्हें बिना अनुमति के अपलोड किया जाता है। कंपनी ने अदालत से इस मामले से जुड़ी याचिका को खारिज करने की मांग की है।

Google ने 6 जुलाई 2026 को कोर्ट में एक हलफनामा दाखिल किया। इसमें कंपनी ने साफ किया कि Information Technology Act, 2000 के तहत YouTube सिर्फ एक इंटरमीडियरी यानी माध्यम है। इसका मतलब यह है कि वीडियो डालने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी होती है, न कि उस प्लेटफॉर्म की जिस पर वीडियो अपलोड हुआ है। Google का कहना है कि उसके लिए यह तकनीकी और कानूनी रूप से मुमकिन नहीं है कि वह पहले से ही पता लगा ले कि कौन सा वीडियो गलत है और उसे हटा दे।

यह पूरा मामला अरविंद केजरीवाल की उस सुनवाई से जुड़ा है जो 13 अप्रैल 2026 को हुई थी। उस समय सुनवाई के कुछ वीडियो बिना अनुमति के इंटरनेट पर डाल दिए गए थे। एडवोकेट वैभव सिंह ने इस मामले में याचिका दायर की थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले इन वीडियो को लेकर चिंता जताई थी कि इससे न्यायिक गरिमा पर असर पड़ सकता है।

Google ने अपनी दलील में कहा कि भारत के अलग-अलग कोर्ट के नियम अलग होते हैं, इसलिए कंपनी यह तय नहीं कर सकती कि कौन सा वीडियो कानूनी है और कौन सा नहीं। कंपनी ने बताया कि उसकी जिम्मेदारी सिर्फ उन URL को ब्लॉक करना है जिन्हें कोर्ट ने गैरकानूनी घोषित कर दिया हो। Google ने यह भी जानकारी दी कि याचिका में बताए गए 9 वीडियो लिंक में से कई लिंक कोर्ट के आदेश से पहले ही भारत में ब्लॉक किए जा चुके थे और बाकी को कोर्ट के निर्देश के बाद हटा दिया गया।