Ghaziabad में 4 साल की बच्ची से दरिंदगी, सुप्रीम कोर्ट ने अस्पतालों की जवाबदेही पर उठाए सवाल
Ghaziabad: गाजियाबाद में एक 4 साल की बच्ची के साथ हुए रेप और मर्डर केस ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है और उन निजी अस्पतालों पर सवाल उठाए हैं जिन्होंने गंभीर हालत म
Ghaziabad: गाजियाबाद में एक 4 साल की बच्ची के साथ हुए रेप और मर्डर केस ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। इस मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने हस्तक्षेप किया है और उन निजी अस्पतालों पर सवाल उठाए हैं जिन्होंने गंभीर हालत में बच्ची का इलाज करने से मना कर दिया था। पीड़ित पिता का आरोप है कि समय पर इलाज न मिलने की वजह से उनकी बेटी की जान गई।
यह घटना 16 मार्च 2026 को हुई थी, जब आरोपी गौरव ने बच्ची को बहला-फुसलाकर उसका यौन शोषण किया और फिर ईंट से हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया। पुलिस ने 19 मार्च 2026 को मुठभेड़ के बाद आरोपी गौरव को गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103, 238, 66 और पोक्सो एक्ट (Pocso Act) की धारा 5 और 6 के तहत 900 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है।
मामले में नया मोड़ तब आया जब बच्ची के पिता ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने बताया कि गंभीर हालत में बच्ची को लेकर वह Khajan Singh Manvi Health Care और St Joseph’s Hospital गए थे, लेकिन दोनों अस्पतालों ने इमरजेंसी इलाज देने से इनकार कर दिया। पिता का कहना है कि बच्ची दो घंटे तक जीवित थी, लेकिन सरकारी अस्पताल पहुँचने से पहले ही उसकी मौत हो गई।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर बनी स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी जांच में पिता के इन आरोपों को सही पाया है। कोर्ट अब इस बात की जांच कर रहा है कि अस्पतालों ने इलाज क्यों नहीं किया और इसके लिए कौन जिम्मेदार है। इसके अलावा, पिता ने पुलिस पर भी आरोप लगाया कि उन्होंने इलाके में ड्रग्स के इस्तेमाल और सिरिंजों के बारे में पहले ही शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने कोई एक्शन नहीं लिया।