UP की गरिमा पटेल का बिहार में चयन, इतिहास विषय की असिस्टेंट प्रोफेसर बनीं गोल्ड मेडलिस्ट

UP/Barabanki: बाराबंकी की रहने वाली गरिमा पटेल ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) ने उन्हें इतिहास विषय में सहायक प्रोफेसर (Assistant Professor) के पद पर चुना है। गरिमा की इस उपलब्धि

UP/Barabanki: बाराबंकी की रहने वाली गरिमा पटेल ने बड़ी कामयाबी हासिल की है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) ने उन्हें इतिहास विषय में सहायक प्रोफेसर (Assistant Professor) के पद पर चुना है। गरिमा की इस उपलब्धि से उनके गृह जनपद में खुशी का माहौल है।

गरिमा पटेल की शैक्षणिक योग्यता काफी शानदार रही है। उन्होंने लखनऊ विश्वविद्यालय से तीन गोल्ड मेडल जीते थे। इसके बाद 2026 में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से इतिहास में 84.4% अंकों के साथ मास्टर डिग्री हासिल की। उनकी इसी काबिलियत की वजह से उन्हें डॉ. उषा रानी बंसल मेरिट-कम-मीन्स छात्रवृत्ति भी मिली थी।

बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग के मुताबिक, आयोग का मकसद पारदर्शी तरीके से ऐसे शिक्षकों को चुनना है जो शिक्षण और रिसर्च में नए विचार ला सकें। आयोग बिहार की उच्च शिक्षा की तस्वीर बदलना चाहता है।

नए नियमों की बात करें तो अब असिस्टेंट प्रोफेसर बनने के लिए केवल NET, SET या PhD काफी नहीं होगा। ड्राफ्ट स्टैच्यूट-2026 के तहत अब लिखित परीक्षा, इंटरव्यू और टीचिंग स्किल टेस्ट भी लिया जाएगा। पूरा चयन 200 अंकों के आधार पर होगा, जिसमें रिसर्च वर्क और एपीआई स्कोर को भी देखा जाएगा। सहायक प्रोफेसर के लिए अधिकतम उम्र 43 वर्ष रखी गई है।

वहीं आयोग बिहार के कॉलेजों में करीब 9,532 स्थायी पदों पर भर्ती की तैयारी कर रहा है, जिसकी प्रक्रिया सितंबर 2026 से शुरू होने की उम्मीद है। आयोग के अध्यक्ष गिरीश कुमार चौधरी ने बताया कि सरकार ने रिक्त पदों का रोस्टर तैयार कर लिया है। बिहार में पहली बार असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए लिखित परीक्षा अनिवार्य की गई है।