मुंबई समेत देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़े, ट्रांसपोर्टर्स बोले- अब काम करना मुश्किल

Finance : मुंबई और देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी से आम जनता और ट्रांसपोर्टरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 15 मई से अब तक चार बार दाम बढ़ चुके हैं, जिससे प्रति लीटर करीब 8 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है।

Finance : मुंबई और देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में लगातार बढ़ोत्तरी से आम जनता और ट्रांसपोर्टरों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। 15 मई से अब तक चार बार दाम बढ़ चुके हैं, जिससे प्रति लीटर करीब 8 रुपये तक की बढ़ोतरी हुई है। इस वजह से माल ढोने वाले ट्रक ड्राइवरों और ट्रांसपोर्ट कंपनियों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है।

कीमतों में कितनी बढ़ोतरी हुई और अब क्या रेट है?

मुंबई में पेट्रोल की कीमत 111.21 रुपये और डीजल 97.83 रुपये प्रति लीटर तक पहुंच गई है। तेल कंपनियों ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और पश्चिम एशिया के तनाव को इसका कारण बताया है।

तारीख बढ़ोत्तरी (लगभग)
15 मई 2026 ₹3 प्रति लीटर
19 मई 2026 90-94 पैसे प्रति लीटर
23 मई 2026 87-91 पैसे प्रति लीटर
25 मई 2026 ₹2.61 से ₹2.81 प्रति लीटर

ट्रांसपोर्टरों पर क्या असर पड़ रहा है?

All India Motor Transport Congress (AIMTC) के मुताबिक, ट्रक चलाने के कुल खर्च में 55% हिस्सा अकेले ईंधन का होता है। टायर, टोल और बीमा के बढ़ते दामों के बीच डीजल महंगा होने से ट्रांसपोर्टरों को प्रति वाहन करीब 3,500 रुपये का रोजाना नुकसान हो रहा है। कई गाड़ियां अब खड़ी हैं क्योंकि उन्हें चलाना घाटे का सौदा साबित हो रहा है।

क्या बढ़ेंगे घर के राशन और सब्जियों के दाम?

All India Transporters’ Welfare Association (AITWA) ने चेतावनी दी है कि डीजल महंगा होने से माल ढुलाई महंगी होगी। इसका सीधा असर आम आदमी की जेब पर पड़ेगा और दूध, सब्जी समेत रोजमर्रा की जरूरी चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। ट्रांसपोर्टरों ने सरकार से मांग की है कि वे किराए तय करने का एक सही मॉडल लाएं ताकि सप्लाई चेन न टूटे।

Frequently Asked Questions (FAQs)

डीजल के दाम बढ़ने पर ट्रांसपोर्टर किराए कैसे बढ़ा रहे हैं?

AITWA ने 20 मई से Fuel Adjustment Factor (FAF) लागू किया है। इसके तहत डीजल की कीमत में हर 1 रुपये की बढ़ोत्तरी पर भाड़ा 0.65% बढ़ाया जाएगा।

तेल कंपनियों ने दाम बढ़ाने का क्या कारण बताया है?

OMCs ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, कमजोर रुपये और पश्चिम एशिया के स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में तनाव को कीमतों में बढ़ोतरी का मुख्य कारण बताया है।