विदेश पढ़ने गए बच्चों के लिए ‘मम्मी वाला खाना’ भेज रहे माता-पिता, Food Dehydration बिजनेस में 20% की ग्रोथ

Finance: विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों की बढ़ती संख्या ने भारत में फूड डिहाइड्रेशन और फ्रीज-ड्राइंग के बिजनेस को नई रफ़्तार दे दी है। अब माता-पिता अपने बच्चों को घर का बना शुद्ध खाना भेजने के लिए इन आधुनिक तकनीको

Finance: विदेश में पढ़ाई कर रहे भारतीय छात्रों की बढ़ती संख्या ने भारत में फूड डिहाइड्रेशन और फ्रीज-ड्राइंग के बिजनेस को नई रफ़्तार दे दी है। अब माता-पिता अपने बच्चों को घर का बना शुद्ध खाना भेजने के लिए इन आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रहे हैं। व्यापारियों के मुताबिक यह बिजनेस हर साल 20% की दर से बढ़ रहा है और मुंबई, दिल्ली, अहमदाबाद और सोनीपत जैसे शहरों में इसके छोटे-बड़े कारखाने खुल गए हैं।

भारतीय फ्रीज-ड्राइड फूड मार्केट की वैल्यू 2025 में 122.6 मिलियन अमेरिकी डॉलर थी, जिसके 2034 तक बढ़कर 361.1 मिलियन डॉलर होने का अनुमान है। इस सेक्टर में 2026 से 2034 के बीच 12.11% की सालाना ग्रोथ रेट (CAGR) देखी जा सकती है। वहीं, भारत में डिहाइड्रेटेड फूड इम्पोर्ट मार्केट ने 2020 से 2024 के बीच 50.99% की जबरदस्त बढ़त दर्ज की है।

इस बिजनेस में कई स्टार्टअप्स और छोटे उद्यमी सक्रिय हैं। सोनीपत की Avarya और DryM Foods जैसी कंपनियां अमेरिका, कनाडा, यूएई, जर्मनी और यूके जैसे देशों में ‘होम-स्टाइल’ मील भेज रही हैं। मुंबई में श्रेया शाह और ललित मेइशरी (Indian Harvest) जैसे लोग घर के खाने को डिहाइड्रेट करने का काम कर रहे हैं। पुणे में KK Foods और तेलंगाना में Koh! Foods जैसे स्टार्टअप्स भी इस बाजार का हिस्सा हैं।

इंडिकेटर डेटा/विवरण
सालाना ग्रोथ (व्यापारी के अनुसार) 20%
मार्केट वैल्यू (2025) 122.6 मिलियन USD
अनुमानित वैल्यू (2034) 361.1 मिलियन USD
इम्पोर्ट मार्केट CAGR (2020-24) 50.99%
फ्रीज-ड्राइड मार्केट CAGR (2026-34) 12.11%
डिहाइड्रेटेड फल-सब्जी ग्रोथ 8-10% (अगले 5 साल)

विशेषज्ञों का कहना है कि फ्रीज-ड्राइंग तकनीक पुराने तरीकों से बेहतर है क्योंकि इसमें खाने का स्वाद, बनावट और पोषण बना रहता है। सरकार की PMFME स्कीम के तहत इन प्रोजेक्ट्स को सब्सिडी भी मिल रही है। हालांकि, हालिया रिपोर्ट बताती है कि वीजा नियमों और बढ़ती लागत के कारण 2023 से 2025 के बीच विदेश जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या में 31% की गिरावट आई है, जो इस बिजनेस के मुख्य ग्राहक रहे हैं।

इस पूरे सेक्टर की निगरानी FSSAI करता है ताकि फूड सेफ्टी और लेबलिंग के नियमों का पालन हो। वहीं, APEDA कृषि उत्पादों के एक्सपोर्ट को बढ़ावा देने और क्वालिटी स्टैंडर्ड तय करने का काम कर रहा है।