Europe में भीषण गर्मी का कहर, Italy और Spain समेत कई देशों में रेड अलर्ट, सैकड़ों लोगों की मौत
World: यूरोप के कई देशों में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। Italy, Spain और Balkans के इलाकों में तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिसके कारण जंगलों में आग लग रही है और लोगों की सेहत पर बु
World: यूरोप के कई देशों में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है जिससे जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। Italy, Spain और Balkans के इलाकों में तापमान बहुत ज्यादा बढ़ गया है, जिसके कारण जंगलों में आग लग रही है और लोगों की सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है। अब तक इस गर्मी की वजह से सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और आने वाले हफ्ते में तापमान और बढ़ने की आशंका है।
Spain में स्थिति काफी गंभीर है जहाँ पिछले कुछ दिनों में गर्मी के कारण 327 लोगों की मौत हो चुकी है। Italy के बड़े शहरों जैसे Rome, Milan, Florence और Turin में स्वास्थ्य मंत्रालय ने ‘रेड अलर्ट’ जारी किया है। Rome के मेयर ने लोगों की मदद के लिए कूलिंग सेंटर खोले हैं और निर्माण कार्य व खेती में लगे मजदूरों के लिए दोपहर के समय आराम का समय तय किया है। Italy में 24 जून को गर्मी से 4 लोगों की मौत की खबर आई थी।
France में भी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी देखी गई जहाँ 24 जून को औसत तापमान 30.0°C रहा और Pulluau में यह 43.8°C तक पहुँच गया। गर्मी से बचने के लिए जब लोग पानी की तलाश में निकले, तो WMO के मुताबिक फ्रांस में डूबने की 40 घटनाएं सामने आईं। वहीं Germany के Saarland में 41.3°C तापमान दर्ज किया गया जो वहां का नया रिकॉर्ड बन गया है। UK के मध्य और दक्षिणी हिस्सों में भी रेड हेल्थ अलर्ट जारी किया गया था।
गर्मी के बढ़ते खतरे को देखते हुए Paris जैसे शहरों में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर रोक लगा दी गई है क्योंकि भीषण गर्मी में शराब सेहत के लिए और ज्यादा खतरनाक हो सकती है। Balkans के देशों में भी हालात मुश्किल हैं, जहाँ Bosnia और Albania में तापमान 40°C तक पहुँचने का अनुमान है। Kosovo के मौसम विभाग ने कमजोर और बुजुर्ग लोगों को दिन के समय घर के अंदर रहने की सलाह दी है।
World Weather Attribution ग्रुप के वैज्ञानिकों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) के बिना जून के महीने में इतनी भीषण गर्मी होना लगभग नामुमकिन था। UN के जलवायु प्रमुख Simon Stiell ने भी कहा कि इस भीषण गर्मी के पीछे जलवायु संकट का हाथ है। WMO और कई देशों की मौसम एजेंसियां अब लोगों की जान बचाने के लिए हीट-हेल्थ एक्शन प्लान पर काम कर रही हैं।