India में अल नीनो का खतरा, खरीफ की फसलें हो सकती हैं बर्बाद; UP, MP और राजस्थान समेत 13 राज्यों पर नजर
India: देश के किसानों के लिए चिंता की खबर है क्योंकि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अल नीनो की आधिकारिक शुरुआत की पुष्टि कर दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वजह से भारत के कई हिस्सों में भीषण सूखा पड़ सकता है, जबक
India: देश के किसानों के लिए चिंता की खबर है क्योंकि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अल नीनो की आधिकारिक शुरुआत की पुष्टि कर दी है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस वजह से भारत के कई हिस्सों में भीषण सूखा पड़ सकता है, जबकि कुछ जगहों पर मूसलाधार बारिश होगी। इसका सीधा असर खरीफ की फसलों पर पड़ेगा, जिससे खेती-किसानी को बड़ा नुकसान होने की आशंका है।
IMD ने 13 जून 2026 को अल नीनो की घोषणा की थी और अब मानसून की बारिश का अनुमान सामान्य से कम यानी लंबी अवधि के औसत का लगभग 90% लगाया गया है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) ने भी चेतावनी दी है कि जुलाई से सितंबर के बीच यह असर और बढ़ेगा, जिससे लू और समुद्री हीटवेव जैसी समस्याएं बढ़ेंगी। कुछ विशेषज्ञ इसे ‘सुपर अल नीनो’ या ‘गॉडजिला अल नीनो’ कह रहे हैं, जो 1950 के बाद सबसे खतरनाक पैटर्न हो सकता है।
इस स्थिति से निपटने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने उच्च स्तरीय बैठक की है और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि निगरानी प्रणाली पूरी तरह सक्रिय है। खेती पर पड़ने वाले असर की बात करें तो धान, दालें, मक्का, ज्वार और बाजरा जैसी फसलें सबसे ज्यादा जोखिम में हैं। सोयाबीन और कपास की बुवाई में भी देरी हुई है।
| विवरण | जानकारी |
|---|---|
| प्रभावित राज्य | UP, MP, राजस्थान, महाराष्ट्र, गुजरात, बिहार, झारखंड, पंजाब, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, पश्चिम बंगाल और ओडिशा |
| संवेदनशील जिले | कुल 326 जिलों की पहचान की गई है |
| बुवाई का हाल | 350.85 लाख हेक्टेयर में बुवाई हुई, जो पिछले साल से 91.95 लाख हेक्टेयर कम है |
| बीज स्टॉक | आपात स्थिति के लिए 1.75 लाख क्विंटल प्रमाणित बीजों का बफर स्टॉक तैयार |
| सरकारी सलाह | कम पानी वाली फसलें जैसे मोटे अनाज, मूंग और उड़द बोने की सलाह |
सरकार ने 262 संवेदनशील जिलों के लिए विशेष योजनाएं तैयार की हैं और किसानों को ड्रिप सिंचाई जैसी तकनीक अपनाने को कहा है। जून में ‘खेत बचाओ अभियान’ के जरिए 80 लाख किसानों को जागरूक किया गया। साथ ही, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) की प्रक्रिया को तेज किया गया है ताकि किसानों को आर्थिक मदद मिल सके।