Maharashtra: राज्य की राजनीति में इन दिनों शिव सेना के दो गुटों के एक होने की चर्चाएं तेज थीं, लेकिन डिप्टी सीएम Eknath Shinde ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सोमवार को उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी ही बालास
Maharashtra: राज्य की राजनीति में इन दिनों शिव सेना के दो गुटों के एक होने की चर्चाएं तेज थीं, लेकिन डिप्टी सीएम Eknath Shinde ने इन अटकलों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। सोमवार को उन्होंने साफ कहा कि उनकी पार्टी ही बालासाहेब ठाकरे की असली विचारधारा को आगे बढ़ा रही है। शिंदे का मानना है कि जनता ने उन्हें और उनके ‘धनुष-बाण’ चुनाव चिन्ह को अपना समर्थन दिया है।
क्या Eknath Shinde और Uddhav Thackeray की पार्टी एक होगी?
डिप्टी सीएम Eknath Shinde ने विलय की खबरों को नजरअंदाज करते हुए कहा कि उनकी सरकार ‘हिंदू हृदय सम्राट बालासाहेब ठाकरे’ के विचारों पर चल रही है। उन्होंने दावा किया कि उनका गुट ही असली शिव सेना है और उनके पास आम जनता का जनादेश है। शिंदे ने कहा कि वे महाराष्ट्र के लोगों की उम्मीदों को पूरा करने के लिए काम कर रहे हैं और उन्हें किसी विलय की जरूरत नहीं है।
पार्टी के अंदर और बाहर क्यों हो रही है एक होने की मांग?
एक तरफ शिंदे विलय से इनकार कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ दोनों गुटों के कुछ बड़े नेता इसे जरूरी बता रहे हैं। शिव सेना (UBT) के नेता Ambadas Danve और शिंदे गुट के मंत्री Abdul Sattar ने कहा है कि बीजेपी का बढ़ता प्रभाव शिव सेना के अस्तित्व के लिए खतरा बन सकता है। अब्दुल सत्तार का कहना है कि अगर शिंदे साथ दें, तो यह मिलन जल्दी हो सकता है क्योंकि बीजेपी शिव सेना को खत्म करने की कोशिश कर रही है।
आने वाले चुनाव और सीटों का गणित क्या है?
महाराष्ट्र में होने वाले विधान परिषद चुनाव के लिए Mahayuti गठबंधन ने अपनी रणनीति तय कर ली है। इस गठबंधन में बीजेपी, शिंदे गुट और अजित पवार की NCP शामिल हैं। सीटों का बंटवारा इस तरह हुआ है:
- BJP: 11 सीटें
- Shiv Sena (Shinde): 4 सीटें
- NCP (Ajit Pawar): 2 सीटें
शिंदे ने भरोसा जताया है कि उनका गठबंधन सभी 17 सीटों पर जीत दर्ज करेगा। उन्होंने यह भी कहा कि नामांकन वापस लेने की 4 जून की समय सीमा से पहले गठबंधन के नेता आंतरिक विवादों को सुलझा लेंगे।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Eknath Shinde ने विलय पर क्या कहा?
Eknath Shinde ने विलय की अटकलों को खारिज करते हुए कहा कि उनका गुट ही बालासाहेब ठाकरे की असली विचारधारा का प्रतिनिधित्व करता है और उनके पास जनता का समर्थन है।
शिव सेना के नेताओं द्वारा विलय की मांग क्यों की जा रही है?
अब्दुल सत्तार और अंबदास दानवे जैसे नेताओं का मानना है कि बीजेपी का प्रभाव बढ़ने से शिव सेना का अस्तित्व खतरे में है, इसलिए दोनों गुटों का एक होना जरूरी है।