Gaza संकट: मिस्र ने रखा इजरायल के सामने अपनी शर्तें, शांति समझौते पर बढ़ा तनाव
World: गाजा पट्टी में युद्ध के बाद की व्यवस्थाओं को लेकर मिस्र ने अपना कड़ा रुख साफ कर दिया है। मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलत्टी ने अंतरराष्ट्रीय दूत निकोलाई म्लादेनोव के साथ बातचीत में कहा कि जब तक इजरायली सेना पूरी
World: गाजा पट्टी में युद्ध के बाद की व्यवस्थाओं को लेकर मिस्र ने अपना कड़ा रुख साफ कर दिया है। मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलत्टी ने अंतरराष्ट्रीय दूत निकोलाई म्लादेनोव के साथ बातचीत में कहा कि जब तक इजरायली सेना पूरी तरह बाहर नहीं निकलती और मानवीय मदद की सप्लाई लाइन चालू नहीं रहती, तब तक शांति रोडमैप के दूसरे चरण को शुरू नहीं किया जा सकता।
9 अगस्त 2026 को हुई इस बातचीत में मिस्र ने कई जरूरी शर्तें रखी हैं। बदर अब्देलत्टी ने कहा कि गाजा के प्रशासन के लिए नेशनल कमेटी को पट्टी के अंदर से काम शुरू करने की ताकत मिलनी चाहिए। साथ ही, युद्धविराम की निगरानी और सुरक्षा के लिए एक इंटरनेशनल स्टेबलाइजेशन फोर्स की तैनाती की जानी चाहिए, ताकि फिलिस्तीनी इलाकों की अखंडता बनी रहे। अंत में, गाजा और वेस्ट बैंक की पूरी जिम्मेदारी फिलिस्तीनी अथॉरिटी को सौंपी जानी चाहिए।
दूसरी तरफ, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने बोर्ड ऑफ पीस द्वारा मंजूर किए गए 15 सूत्रीय शांति प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। नेतन्याहू का कहना है कि जब तक हमास पूरी तरह से निशस्त्र नहीं हो जाता, तब तक इजरायल अपनी मौजूदा जगहों से पीछे नहीं हटेगा। यह स्थिति उस योजना के उलट है जिसमें इजरायली सेना को धीरे-धीरे ‘येलो लाइन’ तक वापस जाना था।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अक्टूबर 2025 में हुए युद्धविराम और बंधकों की रिहाई समझौते के बाद से इजरायल ने गाजा पर अपना नियंत्रण 53 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत से ज्यादा कर लिया है। अब दुनिया की नजरें इस बात पर हैं कि क्या सभी पक्ष अपनी जिम्मेदारियां निभाएंगे या शांति की यह कोशिशें नाकाम होंगी।