Delhi: बिजनेसमैन Robert Vadra को शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी राहत नहीं मिली है। गुरुवार को Delhi High Court में Enforcement Directorate (ED) ने Vadra की उस याचिका का कड़ा विरोध किया, जिसमें उन
Delhi: बिजनेसमैन Robert Vadra को शिकोहपुर जमीन सौदे से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में बड़ी राहत नहीं मिली है। गुरुवार को Delhi High Court में Enforcement Directorate (ED) ने Vadra की उस याचिका का कड़ा विरोध किया, जिसमें उन्होंने कोर्ट द्वारा जारी समन को चुनौती दी थी। अब इस मामले की अगली सुनवाई 18 मई को होगी।
ED ने कोर्ट में क्या दलीलें दीं?
ED के वकील ज़ोहेब हुसैन ने कोर्ट में कहा कि Robert Vadra की याचिका गलत बयानों पर आधारित है और इसे जुर्माने के साथ खारिज किया जाना चाहिए। एजेंसी ने बताया कि इस केस में 58 करोड़ रुपये को अपराध की कमाई माना गया है और करीब 38.69 करोड़ रुपये की 43 संपत्तियों को कुर्क किया गया है। ED ने आरोपी के लिए PMLA की धारा 4 के तहत सात साल की कड़ी सजा की मांग की है।
Robert Vadra और उनके वकील का क्या कहना है?
Vadra की तरफ से पेश सीनियर एडवोकेट अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि जिन नियमों के तहत यह केस चलाया जा रहा है, वे अपराध होने के समय लागू नहीं थे। उन्होंने कहा कि 2008 से 2012 के बीच हुए इस सौदे पर बाद में बने नियमों को लागू करना गलत है। Robert Vadra ने इस पूरे मामले को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया है और किसी भी गलत काम से इनकार किया है।
क्या है पूरा शिकोहपुर जमीन मामला?
यह विवाद फरवरी 2008 में हुई एक जमीन डील से शुरू हुआ था, जिसे Robert Vadra की कंपनी Skylight Hospitality ने Omkareshwar Properties से खरीदा था। बाद में इस जमीन को DLF को काफी ज्यादा कीमत पर बेचा गया। अक्टूबर 2012 में IAS ऑफिसर अशोक खेमका ने नियमों में गड़बड़ी बताते हुए इस जमीन के म्यूटेशन को रद्द कर दिया था, जिसके बाद यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग की जांच तक पहुंच गया।
Frequently Asked Questions (FAQs)
Robert Vadra पर क्या आरोप हैं और मामला क्या है?
Robert Vadra पर 2008 के शिकोहपुर जमीन सौदे में मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप है। ED का दावा है कि इस सौदे में करीब 58 करोड़ रुपये की अपराध की कमाई शामिल है और इस वजह से उनकी कई संपत्तियां कुर्क की गई हैं।
कोर्ट की अगली सुनवाई कब है और मुख्य मुद्दा क्या है?
अगली सुनवाई 18 मई को होगी। मुख्य मुद्दा यह है कि क्या PMLA के नियमों को पुराने मामलों पर लागू किया जा सकता है (Retrospectivity), जिस पर जस्टिस मनोज जैन ने विस्तृत बहस के निर्देश दिए हैं।