Loni Cooperative Society Scam: ED ने रवि शंकर तिवारी को किया गिरफ्तार, 10 हजार करोड़ की धोखाधड़ी का आरोप

Finance: करोड़ों रुपये के निवेश के नाम पर आम लोगों को ठगने वाले Loni Urban Multi-State Credit and Thrift Cooperative Society (LUCC) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED ने इस घोटाले में शामिल रवि श

Finance: करोड़ों रुपये के निवेश के नाम पर आम लोगों को ठगने वाले Loni Urban Multi-State Credit and Thrift Cooperative Society (LUCC) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने बड़ी कार्रवाई की है। ED ने इस घोटाले में शामिल रवि शंकर तिवारी उर्फ रवि तिवारी को गिरफ्तार कर लिया है। तिवारी को 15 जुलाई 2026 को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उन्हें 10 दिन की ED रिमांड पर भेज दिया गया है।

इस पूरे मामले की जड़ें उत्तर प्रदेश के ललितपुर और मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में दर्ज FIR से जुड़ी हैं। जांच में सामने आया कि LUCC और उससे जुड़ी अन्य कंपनियों ने लोगों को ज्यादा मुनाफे का लालच देकर निवेश कराया और फिर उन पैसों का गलत इस्तेमाल किया। यह पूरा खेल एक पोंजी स्कीम की तरह चल रहा था, जहां नए निवेशकों के पैसों से पुराने निवेशकों को भुगतान किया जाता था। ED के मुताबिक, इस घोटाले में करीब 30.51 लाख निवेशक फंसे हैं और करीब 10,314 करोड़ रुपये का गबन हुआ है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए सेंट्रल रजिस्ट्रार ऑफ कोऑपरेटिव सोसाइटीज ने 5 मार्च 2025 को LUCC को बंद करने का आदेश दिया था। वहीं, उत्तराखंड हाई कोर्ट के निर्देश पर CBI ने भी इस मामले की जांच की और 11 जुलाई 2026 को 18 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। CBI ने अब तक उत्तराखंड, यूपी और मुंबई में करीब 25 करोड़ रुपये की 23 संपत्तियां भी जब्त की हैं।

मुख्य विवरण जानकारी
मुख्य आरोपी (फरार) समीर अग्रवाल और उनकी पत्नी सानिया अग्रवाल
गिरफ्तार आरोपी रवि शंकर तिवारी (SAGA ग्रुप के वरिष्ठ पदाधिकारी)
कुल प्रभावित निवेशक करीब 30.51 लाख (ED के अनुसार)
अनुमानित धोखाधड़ी ₹10,314 करोड़ (ED), ₹800 करोड़ (CBI)
जब्त संपत्ति ₹25 करोड़ की 23 संपत्तियां
संबंधित कानून PMLA, BUDS Act, IPC और BNS

जांच में यह भी पता चला है कि रवि शंकर तिवारी 2009 से समीर अग्रवाल के नेतृत्व वाले SAGA ग्रुप नेटवर्क से जुड़े हुए थे। समीर अग्रवाल, जिन्होंने 2016 में LUCC का कंट्रोल लिया था, फिलहाल विदेश में छिपे हुए हैं और उनके खिलाफ ब्लू कॉर्नर और लुकआउट नोटिस जारी किए गए हैं। इस घोटाले में मुंबई की करीब 10 शेल कंपनियों का इस्तेमाल फंड ट्रांसफर करने के लिए किया गया था।